SonamWangchuk – अनशन खत्म होने के बाद भी जारी रहेगा आंदोलन, क्या बदला समीकरण…
SonamWangchuk– सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक चले अपने अनशन को केंद्र सरकार से तीन मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में अनशन टूटने के बावजूद जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ किया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि अनशन समाप्त होने के बाद इस पूरे घटनाक्रम का आगे क्या असर पड़ सकता है।

शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में लंबा अनुभव
सोनम वांगचुक पिछले कई दशकों से लद्दाख में शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर काम कर रहे हैं। वर्ष 1988 में उन्होंने SECMOL की स्थापना की, जिसके माध्यम से स्थानीय शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कई प्रयास किए गए। बाद में उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक शिक्षा, जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा पर केंद्रित HIAL संस्थान की शुरुआत की। आइस स्तूप जैसी पहल के कारण भी उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। वर्ष 2018 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
लद्दाख के मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहे
वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को लेकर विभिन्न मांगों के समर्थन में अभियान चलाते रहे हैं। इनमें क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा, स्थानीय अधिकारों की मजबूती और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने कई बार अनशन, धरना और पदयात्रा जैसे शांतिपूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया। इन अभियानों के दौरान वे राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बने।
गिरफ्तारी के बाद भी बने रहे चर्चा में
वर्ष 2025 में लद्दाख से जुड़े आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। इस दौरान उनके संस्थानों और गतिविधियों को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की खबरें सामने आईं। रिहाई के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखना आवश्यक है और उन्होंने अपने अनुभव भी साझा किए थे।
अनशन समाप्त, लेकिन आंदोलन जारी
दिल्ली में जारी छात्र आंदोलन के दौरान वांगचुक 28 जून से अनशन पर बैठे थे। बाद में स्वास्थ्य कारणों से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त कर दिया, लेकिन आंदोलन की मुख्य मांग पूरी न होने के कारण CJP ने प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित होने तक उनका अभियान जारी रहेगा।
आगे की दिशा पर बनी रहेगी नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद सोनम वांगचुक की सार्वजनिक भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकार और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच संवाद की शुरुआत को भी एक अहम कदम माना जा रहा है। वहीं, लद्दाख से जुड़े उनके पुराने मुद्दों और शिक्षा-पर्यावरण के क्षेत्र में चल रहे अभियानों पर भी अब लोगों की नजर बनी रहेगी। फिलहाल छात्र आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम दोनों समानांतर रूप से जारी हैं।