TripuraDGP – बागपत पहुंचा अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर, जारी है जांच
TripuraDGP- त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ की मृत्यु के मामले की जांच जारी है। इस बीच मंगलवार देर रात उनका पार्थिव शरीर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले स्थित उनके पैतृक क्षेत्र पहुंचाया गया। त्रिपुरा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम पार्थिव शरीर के साथ बड़ौत पहुंची। फिलहाल अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर उनके छोटे भाई रविराज के गांधी रोड स्थित आवास पर रखा गया है, जहां परिजन, रिश्तेदार, परिचित और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं।

राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
अनुराग धनखड़ मूल रूप से बागपत के बिहारीपुर गांव के निवासी थे। उनके निधन की खबर से पूरे इलाके में शोक का माहौल है। प्रशासन के अनुसार बुधवार सुबह राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार में प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस विभाग के वरिष्ठ अफसरों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों के शामिल होने की संभावना है।
पुलिस मुख्यालय में मिला था शव
20 जुलाई को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में अनुराग धनखड़ का शव मिलने के बाद राज्य पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। अधिकारियों के अनुसार, घटना के सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस ने अभी तक मामले के कारणों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
शिक्षा से लेकर आईपीएस बनने तक का सफर
अनुराग धनखड़ का जन्म बागपत के बिहारीपुर गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद सरूरपुर खेड़की के इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट और जनता वैदिक महाविद्यालय, बड़ौत से बीएससी (कृषि) की पढ़ाई पूरी की। नौकरी की शुरुआत उन्होंने सिंडिकेट बैंक में फील्ड ऑफिसर के रूप में की। इसी दौरान उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी की और वर्ष 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी बने। बाद में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हुए त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक का पद संभाला।
गांव में पुरानी यादें आज भी कायम
बिहारीपुर गांव में धनखड़ परिवार की पुरानी हवेली आज भी मौजूद है। ग्रामीणों के अनुसार, एक समय पूरा परिवार वहीं रहता था, लेकिन नौकरी और अन्य कारणों से वर्षों पहले परिवार बाहर बस गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुराग धनखड़ करीब 25 वर्ष पहले एक पारिवारिक कार्यक्रम में गांव आए थे। इसके बाद उनका गांव आना नहीं हो सका, हालांकि ग्रामीण आज भी उन्हें अपने बीच की पहचान के रूप में याद करते हैं।
कुछ दिन पहले आए थे बड़ौत
परिवार के सदस्यों के अनुसार, अनुराग धनखड़ लगभग दस दिन पहले अपनी पत्नी के साथ बड़ौत आए थे और अपने छोटे भाई रविराज से मुलाकात की थी। बताया गया कि वह दिल्ली में एक आधिकारिक बैठक के सिलसिले में आए थे और उसी दौरान परिवार के साथ समय भी बिताया। परिजनों का कहना है कि मुलाकात के दौरान उनके व्यवहार में किसी तरह की असामान्य बात महसूस नहीं हुई थी। अब उनके निधन की खबर से परिवार और पूरे क्षेत्र में गहरा शोक है, जबकि जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की जांच कर रही हैं।