UAPA – उमर खालिद मामले पर शशि थरूर ने उठाए निष्पक्ष सुनवाई के सवाल
UAPA – कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेल में बंद पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद को लेकर न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की गई अपनी टिप्पणी में थरूर ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं तो उन्हें अदालत में सबूतों के आधार पर सिद्ध किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर नागरिक की तरह उमर खालिद को भी समयबद्ध और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार, लंबे समय तक मुकदमा शुरू न होना न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े करता है।

इंटरव्यू के बाद सामने आई प्रतिक्रिया
शशि थरूर की यह टिप्पणी ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में प्रकाशित उमर खालिद के साक्षात्कार के बाद आई है। जेल से दिए गए इस इंटरव्यू में उमर खालिद ने कहा कि लंबे समय से हिरासत में रहने के दौरान उन्हें विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज के एक हिस्से की चुप्पी से निराशा हुई। उनका आरोप था कि असहमति से जुड़े मामलों पर पर्याप्त सार्वजनिक समर्थन नहीं मिलने से ऐसी कार्रवाइयों को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ बने माहौल ने उनकी सार्वजनिक छवि को प्रभावित किया है।
किस मामले में हुई थी गिरफ्तारी
उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़े कथित षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप है। इस मामले में उनके खिलाफ UAPA के तहत कार्रवाई की गई थी। दिल्ली दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि हिंसा एक व्यापक साजिश का हिस्सा थी और उमर खालिद की उसमें भूमिका रही। दूसरी ओर, उमर खालिद लगातार इन आरोपों से इनकार करते आए हैं और उनका कहना है कि उनके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया।
जमानत और मुकदमे की स्थिति
मामले में उमर खालिद की ओर से कई बार जमानत याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन अब तक उन्हें नियमित जमानत नहीं मिल सकी है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार मुकदमे की सुनवाई की प्रक्रिया भी अभी पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई है। इसी संदर्भ में शशि थरूर ने कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि समय पर होता हुआ भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने मामले में शीघ्र न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राजनीतिक और कानूनी पक्ष अलग-अलग
भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा है कि अदालतें कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रही हैं। वहीं, उमर खालिद ने अपने साक्षात्कार में जेल में बिताए लंबे समय के मानसिक प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक हिरासत में रहने से व्यक्तिगत जीवन और मानसिक स्थिति पर असर पड़ता है, हालांकि उनके विचारों में कोई बदलाव नहीं आया है। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।