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UCC – बंगाल में समान नागरिक संहिता की तैयारी पर तेज हुई राजनीतिक चर्चा

UCC – पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य में विधानसभा के भीतर इस विषय पर विधेयक लाने की तैयारी की बात सामने आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड द्वारा शुरू किया गया यह प्रयास अब अन्य राज्यों तक पहुंच रहा है और समान नागरिक कानून को लेकर देशभर में चर्चा आगे बढ़ रही है।

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उत्तराखंड मॉडल का किया उल्लेख

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड ने सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया था। उन्होंने अपने पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने इसे “गंगोत्री” की शुरुआत बताया था और उम्मीद जताई थी कि भविष्य में दूसरे राज्य भी इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। उनके अनुसार अब कई राज्य इस विषय पर विचार कर रहे हैं और इससे देशभर में एक समान कानूनी व्यवस्था पर चर्चा को गति मिली है।

समान कानून को बताया न्याय और समानता का माध्यम

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय को लक्ष्य बनाना नहीं है। उनके अनुसार यह व्यवस्था सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करने के विचार पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अन्य राज्य इस दिशा में काम कर रहे हैं और मध्य प्रदेश ने उत्तराखंड से इस संबंध में तैयार मसौदे की जानकारी भी मांगी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई विकसित और मुस्लिम बहुल देशों में भी इस तरह के नागरिक कानून पहले से लागू हैं।

पश्चिम बंगाल में विधेयक की तैयारी

इस बीच पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि राज्य में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उनके अनुसार इस संबंध में एक समिति का गठन किया गया है, जिसकी अगुवाई एक वर्तमान जांच अधिकारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस विषय में विस्तृत जानकारी विधानसभा में साझा की जाएगी और आगे की प्रक्रिया भी वहीं स्पष्ट की जाएगी।

अन्य राज्यों के मॉडल का होगा अध्ययन

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित व्यवस्था को तैयार करते समय गुजरात, उत्तराखंड और असम में अपनाए गए मॉडल का अध्ययन किया जाएगा। उनके मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए राज्य में भी उसी प्रकार आगे बढ़ने की योजना है, जैसी अन्य राज्यों में अपनाई गई थी।

विवाह और उत्तराधिकार जैसे मामलों पर रहेगा फोकस

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे नागरिक मामलों के लिए धर्म से अलग एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। उनका कहना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।

चुनावी वादे से जुड़ा रहा मुद्दा

समान नागरिक संहिता का मुद्दा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी प्रमुख राजनीतिक विषयों में शामिल रहा था। भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में इसे प्रमुख वादों में स्थान दिया था। अब इस विषय पर विधानसभा में संभावित पहल के संकेत मिलने के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे पर चर्चा फिर तेज हो गई है।

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