Expressway – लखनऊ-कानपुर मार्ग पर घटा ट्रैफिक, पुराने हाईवे की ओर लौटे यात्री
Expressway– लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू होने के कुछ ही समय बाद यातायात के पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है। तेज सफर और आधुनिक सुविधाओं के साथ शुरू किए गए इस मार्ग पर शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में वाहन पहुंचे, लेकिन सड़क की मरम्मत, कुछ स्थानों पर धंसाव और बार-बार लगाए गए डायवर्जन के कारण अब कई वाहन चालक दोबारा पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग का इस्तेमाल करने लगे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती अवधि में एक्सप्रेसवे का उपयोग करने वाले करीब 30 प्रतिशत वाहन अब पुराने मार्ग पर लौट गए हैं।

मरम्मत और डायवर्जन से प्रभावित हुई यात्रा
14 जुलाई को एक्सप्रेसवे के संचालन के बाद अब तक कई स्थानों पर सड़क की सतह प्रभावित होने की घटनाएं सामने आई हैं। इन हिस्सों की मरम्मत के लिए समय-समय पर बैरिकेडिंग और डायवर्जन लागू किए गए, जिससे यात्रियों को वैकल्पिक लेन का उपयोग करना पड़ा। नियमित यात्रा करने वाले कई लोगों का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण तेज और निर्बाध सफर का अनुभव प्रभावित हुआ है।
टोल शुल्क भी बना यात्रियों की चिंता
कुछ वाहन चालकों का मानना है कि एक्सप्रेसवे पर लगने वाला टोल शुल्क भी पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग की तुलना में अधिक है। कानपुर के कारोबारी फरहान ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर एक तरफ की यात्रा के लिए लगभग 290 रुपये टोल देना पड़ता है, जबकि पुराने हाईवे पर यह राशि काफी कम है। वहीं, कुछ अन्य यात्रियों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में पुराने मार्ग से यात्रा करना उन्हें अधिक सुविधाजनक और किफायती लग रहा है।
निर्माण के समय किए गए थे बड़े दावे
करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दावा किया था कि परियोजना की निगरानी आधुनिक तकनीक के जरिए की जा रही है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सामग्री और प्रगति पर नजर रखने के लिए Intelligent Machine आधारित सिस्टम का उपयोग किया गया था। परियोजना पर चार हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने की जानकारी भी दी गई थी और सड़क की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय तक टिकाऊ होने का दावा किया गया था।
ट्रैफिक में कमी पर NHAI का पक्ष
एनएचएआई से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में लोग केवल नए एक्सप्रेसवे का अनुभव लेने के लिए भी इस मार्ग का उपयोग कर रहे थे। उनका मानना है कि वास्तविक औसत यातायात का आकलन कुछ महीने बाद ही संभव होगा। सूत्रों के अनुसार, पहले जहां प्रतिदिन लगभग 22 से 24 हजार वाहन इस मार्ग से गुजर रहे थे, वहीं वर्तमान में यह संख्या घटकर करीब 18 से 20 हजार के बीच रह गई है।
मरम्मत पूरी होने का दावा
सोशल मीडिया पर सामने आई शिकायतों के बाद एनएचएआई के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने बताया है कि जिन स्थानों पर तकनीकी समस्याएं थीं, वहां आवश्यक मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया है। प्राधिकरण के अनुसार, फिलहाल एक्सप्रेसवे पर यातायात सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि सड़क पर लगातार निर्बाध और सुरक्षित आवागमन बना रहता है, तो आने वाले समय में वाहन चालकों का भरोसा फिर से मजबूत हो सकता है।