उत्तर प्रदेश

ExpresswayUpdate – गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली टली, दरें तय होने के बाद भी यात्रियों को राहत

ExpresswayUpdate – गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल यात्रियों को टोल शुल्क से राहत मिली हुई है और वाहन बिना किसी भुगतान के इस मार्ग पर चल रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से टोल दरें पहले ही निर्धारित कर दी गई हैं, लेकिन वसूली प्रक्रिया शुरू होने में अभी करीब दो सप्ताह का समय लग सकता है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, टोल लागू करने से पहले प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलना जरूरी है, जिसके बाद ही इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा। फिलहाल इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है।

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विभिन्न वाहनों के लिए तय टोल दरें

टोल संरचना में वाहनों की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं। दोपहिया, तिपहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर की दर रखी गई है। वहीं कार, जीप, वैन और हल्के वाहनों के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर का टोल तय हुआ है।

हल्के वाणिज्यिक वाहनों और मिनी ट्रकों के लिए यह दर 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर है। बस और बड़े ट्रकों के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर जबकि भारी निर्माण उपकरणों और मिट्टी हटाने वाले वाहनों के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर का शुल्क निर्धारित किया गया है। सबसे बड़े श्रेणी के बहु-धुरी और सात या अधिक एक्सल वाले वाहनों के लिए यह दर 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर तक जाती है।

आधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना का उपयोग

लखनऊ से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस 594 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक के साथ तैयार किया गया है ताकि यह हर मौसम में सुरक्षित और टिकाऊ बना रहे। सड़क की ऊपरी परत में विशेष डामर मिश्रण का उपयोग किया गया है, जिसकी मोटाई 100 मिलीमीटर तक रखी गई है। यह संरचना गर्मी और भारी बारिश दोनों परिस्थितियों में सड़क को नुकसान से बचाने में सक्षम है।

निर्माण कार्य में भारी मात्रा में सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसमें लाखों टन सीमेंट, स्टील और रेत शामिल हैं। मिट्टी की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे सड़क की आधार संरचना अधिक स्थिर बनी है।

भारी यातायात के लिए मजबूत डिजाइन

एक्सप्रेसवे का मुख्य कैरिजवे लगभग आधा मीटर मोटी बहु-स्तरीय संरचना के साथ तैयार किया गया है, जिससे यह भारी ट्रैफिक का दबाव आसानी से सहन कर सकता है। इसकी भार वहन क्षमता को करोड़ों मानक एक्सल तक मापा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मार्ग भारी मालवाहक वाहनों के लिए भी सुरक्षित है।

निर्माण में लाखों मानव दिवस का श्रम लगा है और आधुनिक डिजाइन तकनीक के कारण भविष्य में रखरखाव की लागत कम रहने की उम्मीद है।

स्मार्ट निगरानी और भविष्य की योजना

यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली और उन्नत सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे सड़क पर यातायात की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाया जा सकेगा।

कुल मिलाकर गंगा एक्सप्रेसवे न केवल एक बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना है, बल्कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने की क्षमता रखता है।

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