उत्तर प्रदेश

MedicalProbe – कटे हाथ की जांच को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया में हुई देरी

MedicalProbe – कानपुर में एक कटे हुए हाथ की जांच से जुड़ा मामला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय का विषय बना हुआ है। संबंधित अंग फिलहाल जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में सुरक्षित रखा गया है, लेकिन जांच प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रस्तावित समिति के गठन में देरी होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

medical probe severed hand investigation delay

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कुछ दिन पहले जिला प्रशासन को पत्र भेजकर एक बहु-सदस्यीय समिति गठित करने का अनुरोध किया था। इस समिति की मौजूदगी में ही जांच संबंधी आगे की प्रक्रिया पूरी करने का प्रस्ताव रखा गया था।

समिति गठन का इंतजार जारी

कॉलेज प्रशासन के अनुसार, जांच को पारदर्शी और विधिसम्मत तरीके से पूरा करने के लिए प्रशासनिक, चिकित्सा और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक समिति बनाने की सिफारिश की गई थी।

प्रस्ताव के तहत शिकायतकर्ता और समिति के सदस्यों की उपस्थिति में सुरक्षित रखे गए सीलबंद डिब्बे को खोला जाना था। इसके बाद अंग की स्थिति का मूल्यांकन कर यह तय किया जाना था कि वैज्ञानिक जांच संभव है या नहीं।

मेडिकल कॉलेज ने जताई तकनीकी चिंताएं

मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक संरक्षित रखे जाने के कारण संबंधित ऊतकों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। यदि ऊतक अत्यधिक क्षतिग्रस्त या नष्ट पाए जाते हैं, तो जांच की प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए नमूनों की उपयुक्त स्थिति आवश्यक होती है। इसी कारण पहले अंग की वर्तमान स्थिति का आकलन करना जरूरी माना जा रहा है।

विभाग को नहीं मिली नई सूचना

पैथोलॉजी विभाग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि समिति गठन को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। ऐसी स्थिति में मेडिकल कॉलेज प्रशासन अब संबंधित अंग को वापस स्वास्थ्य विभाग को सौंपने की प्रक्रिया पर विचार कर रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर आगे की स्पष्ट दिशा नहीं मिलती, तब तक जांच प्रक्रिया शुरू करना संभव नहीं होगा।

स्वास्थ्य विभाग ने दिया वैकल्पिक सुझाव

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि मेडिकल कॉलेज लिखित रूप में यह बताता है कि वह जांच करने की स्थिति में नहीं है, तो नमूने को किसी अन्य अधिकृत संस्थान में भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित मेडिकल संस्थान की होती है। हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्तरीय संस्थान से भी जांच कराई जा सकती है।

जांच प्रक्रिया में तकनीकी जटिलताएं

विशेषज्ञों के अनुसार, पूरे हाथ की विस्तृत हिस्टोपैथोलॉजी जांच करना अत्यंत जटिल प्रक्रिया हो सकती है। इसके लिए बड़ी संख्या में सूक्ष्म परीक्षण नमूने तैयार करने पड़ सकते हैं, जिसमें काफी समय और संसाधनों की आवश्यकता होती है।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच किस विशेष हिस्से या उद्देश्य से कराई जानी है। ऐसे में वैज्ञानिक दृष्टि से जांच की रूपरेखा तय करना भी एक चुनौती बना हुआ है।

पहचान और जांच दोनों महत्वपूर्ण

मामले से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जांच केवल ऊतकों के परीक्षण तक सीमित नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि संबंधित अंग वास्तव में उसी व्यक्ति का है, जिससे इसे जोड़ा जा रहा है।

फिलहाल सभी संबंधित विभाग आगे की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। समिति गठन और जांच के स्वरूप पर निर्णय होने के बाद ही मामले में अगला कदम उठाया जा सकेगा।

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