PanchayatElection – यूपी में पंचायत चुनाव टलने के संकेत, कार्यकाल बढ़ाने की मांग
PanchayatElection – उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव को लेकर अनिश्चितता का माहौल बनता दिख रहा है। पहले जहां मतदाता सूची 22 अप्रैल तक जारी होने की उम्मीद थी, वहीं अब इसे जून के अंत तक टाल दिया गया है। इस बदलाव के बाद यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि चुनाव निर्धारित समय यानी मई-जून में कराना मुश्किल हो सकता है। इस स्थिति ने चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों और मौजूदा ग्राम प्रधानों दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

प्रधान संगठन ने उठाई कार्यकाल बढ़ाने की मांग
इसी बीच पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने राज्य सरकार से मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग की है। राजधानी लखनऊ में आयोजित एक बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर चर्चा की। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि किसी कारण से चुनाव समय पर नहीं हो पाते हैं, तो प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूदा प्रधानों को ही कुछ समय के लिए जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
विकास कार्यों पर असर का हवाला
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने बैठक के दौरान कहा कि बीते वर्षों में कई विकास कार्य अधूरे रह गए हैं, खासकर महामारी के दौरान योजनाओं की गति प्रभावित हुई थी। उनका तर्क है कि अगर वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया जाता है, तो वे इन अधूरे कामों को पूरा कर सकते हैं। इससे गांवों में चल रही परियोजनाओं को निरंतरता मिलेगी और लोगों को इसका सीधा लाभ होगा।
कार्यकाल समाप्ति की तय तारीख नजदीक
वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त होना है। ऐसे में यदि चुनाव समय पर नहीं कराए जाते हैं, तो प्रशासन के सामने वैकल्पिक व्यवस्था करने की चुनौती होगी। चर्चा यह भी है कि सरकार जरूरत पड़ने पर पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर सकती है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
वित्तीय अनुशासन को लेकर निर्देश
चुनाव में संभावित देरी को देखते हुए प्रशासन ने पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश जारी किए हैं। स्पष्ट किया गया है कि 25 मई तक उपलब्ध धनराशि के भीतर ही सभी विकास कार्य पूरे किए जाएं। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि निर्धारित बजट से अधिक खर्च करने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी पंचायत में इस नियम का उल्लंघन होता है और भुगतान से जुड़ा विवाद खड़ा होता है, तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे।
बैठक में उठाए गए स्थानीय मुद्दे
ग्राम प्रधानों की बैठक में केवल चुनाव ही नहीं, बल्कि गांवों से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इनमें जल जीवन मिशन के तहत सड़कों की मरम्मत, खराब हैंडपंपों की मरम्मत और नए हैंडपंप लगाने की जरूरत, बड़े पैमाने पर पौधरोपण और तालाबों से अतिक्रमण हटाने जैसे विषय शामिल रहे। प्रधानों ने इन कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
आगे की स्थिति पर सबकी नजर
फिलहाल पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन मतदाता सूची में देरी ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित जरूर किया है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के अगले फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि चुनाव कब और किस तरह आयोजित किए जाएंगे।