Rajabhaiya – भानवी सिंह की अर्जी पर एमएलसी समेत कई लोगों पर केस दर्ज करने के आदेश
Rajabhaiya – कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया के परिवार से जुड़ा एक मामला फिर चर्चा में आ गया है। उनकी पत्नी भानवी कुमारी सिंह की ओर से दायर याचिका पर अदालत ने एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने हजरतगंज पुलिस को मामले की जांच शुरू करने का आदेश दिया है। आरोपों में धोखाधड़ी, जालसाजी और साझेदारी फर्म की संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश जैसे गंभीर बिंदु शामिल हैं।

साझेदारी फर्म को लेकर उठा विवाद
भानवी कुमारी सिंह की ओर से अदालत में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि वर्ष 2014 में उन्होंने और अन्य साझेदारों ने मिलकर एक फर्म का पंजीकरण कराया था। आरोप है कि इस फर्म में करोड़ों रुपये का निवेश किया गया और इसके जरिए कई चल एवं अचल संपत्तियां खरीदी गईं। याचिका में दावा किया गया कि इन संपत्तियों की कीमत पांच करोड़ रुपये से अधिक है और इन पर उनका वैध अधिकार है।
फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप
अर्जी में यह भी कहा गया है कि कुछ समय बाद उन्हें जानकारी मिली कि फर्म की संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने के उद्देश्य से दस्तावेजों में कथित रूप से हेराफेरी की जा रही है। भानवी सिंह ने आरोप लगाया कि उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर वर्ष 2020 में कुछ दस्तावेज तैयार किए गए। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर फर्म के पंजीकरण संबंधी रिकॉर्ड में बदलाव किए गए।
पते में बदलाव को लेकर भी शिकायत
याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि फर्म का आधिकारिक पता बदलकर उसे अक्षय प्रताप सिंह के लखनऊ स्थित निजी आवास से जोड़ दिया गया। भानवी सिंह का कहना है कि यह बदलाव उनकी जानकारी और सहमति के बिना किया गया। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी।
पहले परिवाद के रूप में दर्ज हुई थी अर्जी
इस मामले में पहले विशेष एसीजेएम अदालत ने सीधे एफआईआर दर्ज करने के बजाय याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद भानवी सिंह ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दायर की। सत्र अदालत ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए मामले में आगे कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला
सत्र अदालत के आदेश के खिलाफ अक्षय प्रताप सिंह की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में सत्र अदालत के फैसले को रद्द करने की मांग की गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने मार्च में इस याचिका को खारिज कर दिया और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद अब एमपी-एमएलए कोर्ट ने मुकदमा दर्ज कर जांच करने का निर्देश जारी किया है।
पुलिस को दिए गए जांच के आदेश
अदालत ने हजरतगंज थाने के प्रभारी को मामले में एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू करने का आदेश दिया है। हालांकि थाना स्तर पर अधिकारियों का कहना है कि आदेश की प्रति औपचारिक रूप से मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों और अदालत के निर्देशों का अध्ययन करने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी चर्चा
राजा भइया और उनके परिवार से जुड़े इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालत की निगरानी में होने वाली जांच के बाद मामले के कई पहलुओं पर स्पष्टता आ सकती है। फिलहाल सभी पक्षों की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर बनी हुई है।