उत्तर प्रदेश

SkillDevelopment – यूपी में चार लाख युवाओं को मिलेगा आधुनिक कौशल प्रशिक्षण

SkillDevelopment – उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कौशल विकास कार्यक्रम का दायरा बड़े स्तर पर बढ़ाने का निर्णय लिया है। राज्य में चालू वर्ष के दौरान लगभग चार लाख युवाओं को विभिन्न रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। इसके लिए राज्य कौशल विकास कोष में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए इसे 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया गया है। सरकार का उद्देश्य बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें बेहतर रोजगार अवसरों से जोड़ना है।

up skill development training drive

मिशन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। हर तीन महीने में बड़ी संख्या में सीटें प्रशिक्षण संस्थानों और प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को आवंटित की जाएंगी ताकि अधिक से अधिक युवाओं को लाभ मिल सके। पिछले एक दशक में लाखों युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और अब इस प्रक्रिया को और गति देने की तैयारी है।

नई तकनीकों पर आधारित पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता

कौशल विकास कार्यक्रम में इस बार उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिनकी मांग रोजगार बाजार में तेजी से बढ़ रही है। सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रॉनिक्स, कोडिंग, इलेक्ट्रिक वाहन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पाठ्यक्रमों को प्रमुखता दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं के लिए भविष्य में रोजगार के अवसर अधिक उपलब्ध होंगे।

सरकार का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं बल्कि उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन तैयार करना भी है। इसी कारण पाठ्यक्रमों को आधुनिक तकनीकी आवश्यकताओं के हिसाब से तैयार किया जा रहा है।

प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर रहेगा विशेष ध्यान

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सभी जिलों में प्रशिक्षण केंद्रों की निगरानी की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि युवाओं को निर्धारित मानकों के अनुसार शिक्षा और व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण के साथ-साथ युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए विभिन्न उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

आईटीआई में शुरू होंगे आधुनिक तकनीकी कोर्स

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में भी कई नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक और सीएनसी मशीनिंग जैसे आधुनिक विषयों को प्रशिक्षण व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को उन क्षेत्रों के लिए तैयार करना है जहां आने वाले वर्षों में कुशल कार्यबल की मांग बढ़ने की संभावना है।

सरकार का मानना है कि तकनीकी शिक्षा को मजबूत किए बिना युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार नहीं किया जा सकता। इसी सोच के तहत प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

हर जिले में होगी कौशल आवश्यकताओं की पहचान

युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जिला आधारित कौशल मानचित्रण पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक जिले में उद्योगों और व्यवसायों की आवश्यकताओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार होंगे जो स्थानीय रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप हों।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की दूरी कम होगी तथा प्रशिक्षित युवाओं को अपने ही क्षेत्र में अवसर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

नवाचार केंद्रों के विकास की तैयारी

राज्य में पांच विशेष नवाचार और तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। भविष्य में इन्हें उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इन केंद्रों में उन्नत तकनीकों से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिससे युवाओं को आधुनिक उद्योगों के अनुरूप दक्षता हासिल करने का अवसर मिलेगा।

सरकार का मानना है कि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा जा सकते हैं।

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