Veer Bal Diwas Celebration 2025: सीएम योगी ने साहिबजादों की वीरता को नमन करते हुए औरंगजेब के वजूद पर उठाए तीखे सवाल
Veer Bal Diwas Celebration 2025: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर शुक्रवार का दिन भक्ति और राष्ट्रभक्ति की एक अद्भुत मिसाल बन गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिख गुरुओं के चरणों में शीश नवाते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि जो राष्ट्र अपने पूर्वजों के बलिदान को भूल जाता है, उसका अस्तित्व मिट जाता है। इस पावन अवसर पर उन्होंने कहा कि (Spiritual Heritage) ही वह शक्ति है जो हमें कठिन समय में भी अडिग रहने की प्रेरणा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेककर साहिबजादों की वीरता को नमन किया और इस दिन को भारतीय इतिहास का स्वर्णिम पृष्ठ बताया।

औरंगजेब की गुमनाम कब्र और गुरुओं का अमर तेज
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का तेवर काफी कड़ा नजर आया जब उन्होंने मुगल शासकों की बर्बरता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब औरंगजेब खुद को हिंदुस्तान का बादशाह कहता था, लेकिन आज आलम यह है कि उसकी कब्र का पता पूछने वाला भी कोई नहीं है। औरंगजेब ने (Religious Freedom) को कुचलने का प्रयास किया था, लेकिन गुरु तेग बहादुर जी के तेज ने उसकी सत्ता की चूलें हिला दीं। सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि इतिहास केवल उन्हीं का होता है जिनके जीवन में त्याग और लोक कल्याण की भावना कूट-कूट कर भरी होती है।
साहिबजादों के बलिदान की अमर गाथा
वीर बाल दिवस के इस विशेष आयोजन में बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के बलिदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि (Child Martyrs) का ऐसा उदाहरण पूरी दुनिया के इतिहास में कहीं और देखने को नहीं मिलता, जिन्होंने छोटी सी उम्र में धर्म की रक्षा के लिए दीवार में चुना जाना स्वीकार किया लेकिन झुकना नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि इस दिन को राष्ट्रीय मान्यता देकर सरकार ने सिख समाज की भावनाओं का सम्मान किया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श स्थापित किया है।
पाठ्यक्रम में वीरता और शौर्य का समावेश
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अब साहिबजादों की वीरता को स्कूलों तक पहुँचाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब प्रदेश के हर स्कूल और कॉलेज में इन महापुरुषों की गाथाओं को (Educational Curriculum Updates) का हिस्सा बनाया गया है ताकि छात्र समझ सकें कि हमारी स्वतंत्रता कितनी बड़ी कीमत चुकाकर हासिल हुई है। उन्होंने ‘छोटे साहिबजादे’ नामक पुस्तिका का विमोचन भी किया, जो बच्चों को धर्म और देश के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध कराएगी।
भक्ति और शक्ति का अद्भुत समन्वय
सिख गुरुओं की परंपरा को भारत की असली पहचान बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि यह इतिहास भक्ति और शक्ति का एक अद्भुत तेज है। गुरु नानक देव जी द्वारा जलाई गई (Social Equality) की अलख को गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने रक्त से सींचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने देश के कोने-कोने में जाकर मानवता का संदेश दिया और बाद के गुरुओं ने उस संदेश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, यही भारत की महानता का आधार है।
लंगर परंपरा और सामाजिक समरसता
सिख धर्म की लंगर परंपरा की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाने वाला सबसे बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि जहाँ जाति या धर्म पूछे बिना सबको एक साथ बिठाकर भोजन कराया जाता है, वही (Inclusive Society) का सच्चा स्वरूप है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का जो महान कार्य किया, वह आज भी प्रासंगिक है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री स्वयं लंगर में शामिल हुए और सेवा भाव का परिचय देते हुए मंत्रियों के साथ प्रसाद ग्रहण किया।
गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष
इस वर्ष सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष मनाया जा रहा है, जिसे लेकर प्रदेश सरकार ने विशेष तैयारियां की हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि (Double Engine Government) इस ऐतिहासिक वर्ष के सभी कार्यक्रमों को भव्यता के साथ आयोजित करने में हर संभव सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हम उस महान परंपरा के साक्षी बन रहे हैं जिसने देश के आत्मसम्मान को बचाए रखने के लिए अपना शीश कटा दिया लेकिन धर्म के मार्ग से विचलित नहीं हुए।
भविष्य की पीढ़ी के लिए प्रेरणा पुंज
कार्यक्रम के समापन पर आनंद साहिब का पाठ और अरदास की गई, जिसमें पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। मुख्यमंत्री ने छोटे बच्चों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया और कहा कि (Youth Inspiration) के लिए वीर बाल दिवस से बड़ा कोई अन्य अवसर नहीं हो सकता। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक भारतीय युवा को सिख गुरुओं के जीवन से संकल्पशक्ति और वीरता की सीख लेनी चाहिए ताकि भारत को एक बार फिर विश्व गुरु के पद पर आसीन किया जा सके।



