AnkitaCase – ऑडियो विवाद में गिरफ्तार हुए पूर्व विधायक सुरेश राठौर
AnkitaCase – अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ऑडियो और वीडियो प्रसारण के मामले में उत्तराखंड के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को देहरादून पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की यह कार्रवाई उन मामलों से जुड़ी बताई जा रही है जिनमें सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री के जरिए कुछ राजनीतिक नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे।

यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब कुछ ऑडियो क्लिप और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुए थे। इन सामग्रियों में कथित तौर पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का नाम चर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण से जोड़ा गया था। इसके बाद कई शिकायतें दर्ज कराई गईं और जांच शुरू हुई।
भाजपा नेताओं ने दर्ज कराई थी शिकायत
भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी दुष्यंत कुमार गौतम और पार्टी से जुड़ी आरती गौर ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री का उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि कथित ऑडियो और वीडियो जानबूझकर सार्वजनिक किए गए, जिससे राजनीतिक और व्यक्तिगत छवि प्रभावित हो सके।
इन शिकायतों के आधार पर देहरादून और हरिद्वार में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। बाद में इन मामलों ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर ध्यान आकर्षित किया।
हाई कोर्ट में पहुंचा था मामला
सुरेश राठौर ने अपने खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी को अदालत में चुनौती दी थी। उनका पक्ष था कि उन पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और उन्हें गलत तरीके से मामले में घसीटा गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चार प्राथमिकी में से दो को निरस्त कर दिया था। हालांकि शेष दो मामलों में अदालत ने जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। अदालत का मानना था कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया जांच की आवश्यकता बनी हुई है।
अदालत ने कही थी महत्वपूर्ण बात
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति को बिना पर्याप्त आधार के किसी गंभीर अपराध से जोड़ना उसकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने कहा था कि यदि किसी के पास किसी आपराधिक मामले से संबंधित प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों को सौंपना चाहिए, न कि सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक करना चाहिए।
न्यायालय ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इसी आधार पर दो मामलों में पुलिस को आगे की जांच जारी रखने की अनुमति मिली थी।
गिरफ्तारी के बाद बढ़ी चर्चा
सुरेश राठौर की गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कार्रवाई उन्हीं शिकायतों और चल रही जांच प्रक्रिया का हिस्सा है जिन पर अदालत ने जांच जारी रखने की अनुमति दी थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अब आगे की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की दिशा तय होगी। वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।
जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और अदालत की आगे की कार्यवाही इस प्रकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मामले को लेकर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं का भी इंतजार किया जा रहा है