Court – सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हल्द्वानी में बनेगा उत्तराखंड हाईकोर्ट का नया परिसर
Court – उत्तराखंड हाईकोर्ट के नए भवन को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि हल्द्वानी में प्रस्तावित नए हाईकोर्ट परिसर के लिए चिन्हित भूमि का कब्जा छह सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि इस संबंध में आवश्यक अधिसूचना जारी कर पूरी प्रक्रिया तय समय में पूरी की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का पुराना आदेश निरस्त किया
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान उत्तराखंड हाईकोर्ट के वर्ष 2024 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें राज्य सरकार को नैनीताल के बाहर सबसे उपयुक्त स्थान तलाशने का निर्देश दिया गया था। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के प्रशासनिक और आधारभूत ढांचे से जुड़े निर्णय न्यायिक आदेशों के बजाय प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से लिए जाने चाहिए।
हल्द्वानी में पहले ही हो चुकी है जमीन की पहचान
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने हल्द्वानी में नए हाईकोर्ट भवन के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित कर ली है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सभी औपचारिक मंजूरियों के साथ “जैसी स्थिति है, उसी आधार पर” भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए और निर्धारित समयसीमा के भीतर हाईकोर्ट को जमीन सौंप दी जाए।
याचिका पर सुनवाई के बाद आया फैसला
यह मामला हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि हाईकोर्ट का पूर्व आदेश कानूनी दृष्टि से उचित नहीं था। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार और न्यायपालिका की भूमिकाओं को स्पष्ट करते हुए नया आदेश पारित किया।
बढ़ती जरूरतों को देखते हुए नए परिसर की योजना
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 9 नवंबर 2000 से हाईकोर्ट नैनीताल से संचालित हो रहा है। पहले जहां न्यायाधीशों की संख्या काफी कम थी, वहीं समय के साथ न्यायिक कार्यभार और न्यायाधीशों की संख्या दोनों में वृद्धि हुई है। भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए आधुनिक न्यायिक परिसर, आवासीय सुविधाएं, कोर्ट रूम, पार्किंग, सम्मेलन कक्ष और अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त स्थान विकसित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
प्रशासनिक समन्वय पर सुप्रीम कोर्ट का जोर
सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा कि न्यायपालिका और राज्य सरकार को ऐसे आधारभूत ढांचे से जुड़े मामलों में आपसी समन्वय से समाधान निकालना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि न्यायिक संस्थानों के विस्तार से जुड़े फैसले प्रशासनिक स्तर पर बेहतर तरीके से पूरे किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सुविधाओं का विकास समय पर हो सके।