DonationTheft – बदरीनाथ मंदिर में दान में मिले लैपटॉपों का रिकॉर्ड गायब, जांच की तैयारी…
DonationTheft– बदरीनाथ धाम से जुड़े हालिया विवाद के बीच अब मंदिर समिति के रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले आठ से दस वर्षों के दौरान विभिन्न सरकारी और निजी बैंकों की ओर से बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को कार्यालयी कार्यों के लिए 20 से 25 लैपटॉप उपलब्ध कराए गए थे। हालांकि, वर्तमान में इन उपकरणों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने कहा है कि उन्हें इस विषय की तत्काल जानकारी नहीं है और यदि मामला सही पाया जाता है तो इसकी जांच कराई जाएगी।

स्टॉक रजिस्टर भी नहीं मिल रहा
मंदिर समिति से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दान में प्राप्त लैपटॉपों का उल्लेख स्टॉक रजिस्टर में भी नहीं है। बताया जा रहा है कि ये उपकरण भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, कैनरा बैंक सहित अन्य बैंकों ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना के तहत उपलब्ध कराए थे। अब स्थिति यह है कि लैपटॉपों के साथ-साथ संबंधित स्टॉक रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ लैपटॉप समिति से जुड़े लोगों के पास होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
चढ़ावा विवाद के साथ बढ़ी जांच की मांग
बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित अनियमितता का मामला पहले से चर्चा में है। इसी बीच लैपटॉप और रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद पूरे प्रकरण को लेकर पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। मंदिर समिति ने पहले ही चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
जांच दल के पहुंचने में हुई देरी
समिति की ओर से गठित जांच टीम में विधि अधिकारी, वित्त नियंत्रक, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी (केदारनाथ) को शामिल किया गया है। हालांकि, समिति के गठन के तीन दिन बाद तक भी टीम मौके पर नहीं पहुंच सकी। अब जानकारी मिली है कि जांच दल 9 जुलाई को बदरीनाथ पहुंचकर पूरे मामले की पड़ताल शुरू करेगा। इस देरी को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत के बाद बनी उच्च स्तरीय समिति
इस मामले की शुरुआत तीन जुलाई को हुई शिकायत के बाद हुई, जब भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत मिलने के बाद मंदिर समिति के अध्यक्ष की संस्तुति पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई। समिति को चढ़ावे की गिनती से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करने और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
कर्मचारियों से मांगा गया लिखित जवाब
मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि दो जुलाई को चढ़ावे की गिनती में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया था। जवाब जमा करने की अंतिम तिथि छह जुलाई निर्धारित की गई थी। निर्धारित समय तक प्राप्त सभी स्पष्टीकरणों की जांच की जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। समिति का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी प्रकार का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।