उत्तराखण्ड

Investigation – बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा से जुड़े वीआईपी खर्चों पर जांच में उठे नए सवाल

Investigation- उत्तराखंड के बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले के बीच अब वीआईपी यात्रियों के ठहरने और खानपान के खर्चों से संबंधित बिलों की जांच भी चर्चा में है। प्रारंभिक जांच में ऐसे कई मामलों की पहचान होने की बात सामने आई है, जिनमें दावा किया गया है कि जिन यात्रियों का पूरा खर्च स्वयं या उनकी टूर कंपनियों ने वहन किया था, उनके नाम पर भी भुगतान दर्शाने वाले बिल तैयार किए गए। तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को भेजते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की सिफारिश की है।

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प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं का उल्लेख

सूत्रों के अनुसार, मई 2025 से जुड़े इस मामले की जांच के दौरान कई दस्तावेजों और भुगतान अभिलेखों की समीक्षा की गई। रिपोर्ट में पूर्व मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल द्वारा व्यवस्थापक अरविंद शुक्ला को छह लाख रुपये अग्रिम राशि स्वीकृत किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया गया है कि इस प्रस्ताव को तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी अनिल ध्यानी ने तैयार किया था। जांच समिति का मानना है कि लंबित बिलों के निस्तारण के बजाय अग्रिम भुगतान करना निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था।

आरोपित पक्ष ने निर्णय का किया बचाव

मामले में नाम आने वाले कर्मचारियों का कहना है कि जिस अवधि की बात की जा रही है, उस समय बोर्ड का गठन नहीं हुआ था और यात्रा सीजन के दौरान व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए तत्काल निर्णय लेना आवश्यक था। उनका यह भी कहना है कि बाद में बोर्ड के गठन के पश्चात 9 जुलाई 2025 को आयोजित बैठक में संबंधित आय-व्यय को स्वीकृति प्रदान कर दी गई थी।

जनप्रतिनिधियों के नाम पर दर्ज खर्चों पर भी सवाल

जांच के दौरान तैयार खर्च सूची में विधायक आशा नौटियाल के नाम पर केदारनाथ स्थित पंजाब सिंध आवास में ठहरने के लिए 37,500 रुपये तथा भाजपा नेत्री नेहा जोशी के नाम पर आवास और भोजन संबंधी 40,000 रुपये के खर्च का उल्लेख किया गया है। हालांकि दोनों पहले ही इन दावों को सार्वजनिक रूप से खारिज कर चुकी हैं। उनका कहना है कि उन्होंने समिति से किसी प्रकार की आर्थिक सुविधा नहीं ली और यात्रा से जुड़ा पूरा खर्च स्वयं वहन किया था।

कंपनी के दावे से जांच की दिशा बदली

जांच समिति ने एक ऐसे अतिथि से जुड़े भुगतान को भी संदिग्ध माना, जिन्हें दस्तावेजों में सुपर वीआईपी श्रेणी में दर्शाया गया था। रिकॉर्ड में उनके साथ एक राज्य के मुख्य सचिव के केयर टेकर का उल्लेख करते हुए गायत्री भवन में दो दिन के ठहरने का 60 हजार रुपये का बिल दर्ज था। दस्तावेजों की पुष्टि के लिए समिति ने हेरिटेज एविएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित माथुर से जानकारी मांगी। कंपनी की ओर से भेजे गए जवाब में कहा गया कि संबंधित यात्री के पूरे प्रवास का खर्च कंपनी ने स्वयं वहन किया था, जिससे जांच को नया आधार मिला।

अन्य नामों और भुगतानों की भी हो रही जांच

सूत्रों के अनुसार, खर्च सूची में कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम पर भी हजारों रुपये के भुगतान दर्ज हैं, जिनकी सत्यता की जांच की जा रही है। समिति अब संबंधित दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और आवासीय संस्थानों से प्राप्त जानकारी का मिलान कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी भुगतान वास्तविक थे या नहीं।

विभिन्न आवासों के नाम पर दर्ज हुए भुगतान

जांच में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, कथित बिलों में सबसे अधिक 1.54 लाख रुपये का भुगतान पिंक सिटी भवन के नाम पर दर्ज है। इसके अलावा न्यू आगरा हाउस के लिए 1.10 लाख रुपये, जीएमवीएन के लिए 90,940 रुपये, पंजाब सिंध आवास के लिए 83,400 रुपये, बीकानेर हाउस के लिए 79,000 रुपये, गायत्री भवन के लिए 60,000 रुपये और राजस्थान भवन के लिए 48,000 रुपये दर्शाए गए हैं। जांच समिति इन सभी भुगतानों और संबंधित अभिलेखों की विस्तार से जांच कर रही है। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

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