MadarsaInquiry – हरिद्वार में पीएम पोषण योजना की जांच में कई गड़बड़ियां सामने
MadarsaInquiry – उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में पीएम पोषण योजना के तहत संचालित मदरसों की जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रशासन की शुरुआती जांच में 131 मदरसों की पड़ताल की गई, जिनमें से 23 मदरसे संदेह के दायरे में पाए गए हैं। वहीं 11 मदरसों में योजना का संचालन बंद कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार छात्र संख्या, उपस्थिति रजिस्टर और खर्च से जुड़े रिकॉर्ड में कई जगह गड़बड़ी मिली है, जिसके बाद मार्च और अप्रैल महीने की वित्तीय सहायता रोक दी गई है।

राज्य सरकार के निर्देश के बाद मदरसों की जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही सभी संस्थानों की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए थे। इसी के तहत हरिद्वार प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से जांच अभियान शुरू किया है।
छात्र संख्या और रिकॉर्ड पर उठे सवाल
जांच में सामने आया कि कुछ मदरसों में दर्ज छात्र संख्या और वास्तविक उपस्थिति में अंतर पाया गया। कई संस्थानों ने मिड डे मील और छात्रों से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की जांच के दौरान कई दस्तावेज अधूरे मिले, जिससे संदेह और बढ़ गया।
जिला शिक्षा विभाग ने बताया कि जिन मदरसों में नियमों का पालन नहीं पाया गया है, उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि सभी मामलों की गहराई से जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।
बाहरी राज्यों से आए बच्चों की हो रही जांच
प्रशासन को जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली कि कुछ मदरसों में दूसरे राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाया जा रहा है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इन बच्चों को कौन लेकर आया और उनका सत्यापन किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि छात्रों और शिक्षकों दोनों का सत्यापन कराया जा रहा है। इसके लिए एक विशेष समिति भी गठित की गई है, जो पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी संस्थान निर्धारित नियमों और सरकारी मानकों के अनुसार संचालित हों।
11 मदरसों में योजना का संचालन रोका गया
प्रशासन ने 11 मदरसों में पीएम पोषण योजना को फिलहाल बंद करने के आदेश जारी किए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन संस्थानों में छात्रों की संख्या और रिकॉर्ड को लेकर गंभीर संदेह सामने आए थे। इसी वजह से वहां मिड डे मील योजना का संचालन रोक दिया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक अमित चंद ने बताया कि पहले चरण में उन्हीं मदरसों की जांच की गई जो मिड डे मील योजना से जुड़े हुए थे। जांच के दौरान 23 संस्थानों में नियमों का उल्लंघन सामने आया। इनमें से कई मदरसों ने आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई थी।
मान्यता को लेकर सरकार का सख्त रुख
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना मान्यता वाले मदरसों के संचालन को अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार के अनुसार एक जुलाई के बाद केवल वही मदरसे संचालित हो सकेंगे, जिन्हें उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त होगी।
प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में अन्य मदरसों की भी चरणबद्ध तरीके से जांच की जाएगी। जांच का उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना है। अधिकारियों के मुताबिक यदि किसी भी संस्थान में वित्तीय या प्रशासनिक गड़बड़ी साबित होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।