उत्तराखण्ड

RudranathYatra – मई में खुलेंगे रुद्रनाथ धाम के कपाट, तैयारियां तेज…

RudranathYatra – गढ़वाल हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित भगवान शिव के पवित्र रुद्रनाथ धाम के कपाट इस महीने श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोले जाएंगे। पंच केदारों में शामिल यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यता और प्राकृतिक सौंदर्य दोनों के लिए प्रसिद्ध है। शीतकालीन अवकाश के बाद 18 मई को दोपहर एक बजे मंदिर के कपाट विधिवत पूजा-अर्चना के साथ खोले जाएंगे।

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चमोली जिले में समुद्र तल से करीब 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण बंद रहता है। मौसम अनुकूल होने के साथ ही अब मंदिर को दोबारा श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया जा रहा है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ट्रैकिंग प्रेमी यहां पहुंचते हैं।

डोली यात्रा के साथ शुरू होगी धार्मिक प्रक्रिया

मंदिर समिति के अनुसार कपाट खुलने की प्रक्रिया पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के तहत पूरी की जाएगी। भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली 16 मई को गोपेश्वर से रवाना होगी। इसके अगले दिन 17 मई को विशेष पूजा और भव्य डोली यात्रा निकाली जाएगी।

18 मई को वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। सर्दियों के दौरान भगवान रुद्रनाथ की पूजा गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में होती है, जिसे रुद्रनाथ का शीतकालीन गद्दीस्थल माना जाता है।

पंच केदार में खास महत्व रखता है रुद्रनाथ

रुद्रनाथ धाम को पंच केदार यात्रा का चौथा पड़ाव माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव के मुख स्वरूप की पूजा होती है। पौराणिक कथा के मुताबिक महाभारत युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन शिव उनसे बचने के लिए बैल का रूप धारण कर अदृश्य हो गए थे। बाद में उनके शरीर के विभिन्न अंग अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए।

मान्यता है कि भगवान शिव का मुख रुद्रनाथ में प्रकट हुआ था। यही कारण है कि यहां शिव के ‘एकानन’ स्वरूप की आराधना की जाती है। इस मंदिर की विशेषता इसे अन्य केदारों से अलग बनाती है।

प्राकृतिक सौंदर्य भी आकर्षण का केंद्र

रुद्रनाथ यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति प्रेमियों के लिए भी बेहद खास मानी जाती है। मंदिर तक पहुंचने वाला मार्ग घने जंगलों, बुग्यालों और पहाड़ी पगडंडियों से होकर गुजरता है। रास्ते में हिमालय की कई बर्फ से ढकी चोटियों के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं।

मंदिर परिसर से नंदा देवी और त्रिशूल पर्वत श्रृंखला के दर्शन श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभव कराते हैं। शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह स्थान ट्रैकिंग और पर्वतीय पर्यटन के लिहाज से भी लोकप्रिय है।

यहां से शुरू होती है कठिन पैदल यात्रा

रुद्रनाथ पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून का जौली ग्रांट एयरपोर्ट है। वहीं हरिद्वार और ऋषिकेश निकटतम रेलवे स्टेशन माने जाते हैं। यहां से सड़क मार्ग के जरिए गोपेश्वर, सागर गांव या मंडल तक पहुंचा जा सकता है।

इसके बाद श्रद्धालुओं को करीब 18 से 20 किलोमीटर का पैदल ट्रेक पूरा करना पड़ता है। यह मार्ग कठिन माना जाता है, इसलिए यात्रियों को शारीरिक रूप से तैयार रहना जरूरी होता है।

यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों को मौसम और स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए गर्म कपड़े, मजबूत जूते और जरूरी दवाइयां साथ रखना जरूरी माना गया है।

मई-जून और सितंबर-अक्टूबर को यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। मानसून के दौरान भूस्खलन और फिसलन का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए उस समय अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। प्रशासन ने यात्रियों से सुबह जल्दी ट्रेक शुरू करने और मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है।

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