SocialDispute – उत्तरकाशी में देव डोली विवाद के बाद बढ़ा तनाव
SocialDispute – उत्तरकाशी जिले के भराण गांव में गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न विवाद ने स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति पैदा कर दी। आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने दलित समुदाय की ओर से लाई जा रही देव डोली को मुख्य धार्मिक यात्रा में शामिल करने पर आपत्ति जताई। घटना के बाद नाराज ग्रामीण सोमवार देर शाम उत्तरकाशी पहुंचे और अधिवक्ताओं से कानूनी सहायता मांगी।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि भविष्य में भी उनके साथ इस तरह का व्यवहार जारी रहा तो वे अदालत का रुख करने के साथ धर्म परिवर्तन जैसे कदम पर भी विचार कर सकते हैं।
धार्मिक यात्रा के दौरान हुआ विवाद
भराण गांव में हर वर्ष गंगा दशहरा के अवसर पर सोमेश्वर देवता की डोली गंगोत्री धाम ले जाने की परंपरा निभाई जाती है। इस आयोजन में गांव के सभी वर्गों के लोग शामिल होते रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार इस बार यात्रा के लिए प्रत्येक परिवार से आर्थिक सहयोग लिया जा रहा था।
बताया गया कि जब दलित समाज के लोग भी सहयोग राशि देने पहुंचे तो कुछ लोगों ने उन्हें मुख्य यात्रा में शामिल करने पर आपत्ति जताई। आरोप है कि उनसे अलग डोली निकालने की बात कही गई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
ग्रामीण पहुंचे न्यायालय परिसर
घटना से नाराज लोग सीधे उत्तरकाशी न्यायालय परिसर पहुंचे और अधिवक्ताओं से मुलाकात की। उन्होंने मामले में कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि उन्हें अपने धार्मिक आयोजनों और आराध्य देवता की पूजा में समान भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए।
बाद में बार एसोसिएशन के सदस्यों ने ग्रामीणों से बातचीत की और समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद लोग वापस लौट गए। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि भविष्य में भी भेदभाव हुआ तो वे कानूनी कदम उठाएंगे।
पंचायत में हुआ समाधान का प्रयास
गांव के कुछ वरिष्ठ लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मामले को शांत कराने की कोशिश की। जिला पंचायत सदस्य हीरा लाल ने कहा कि सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले भी गांव के लोग एक साथ गंगोत्री, यमुनोत्री और डोडीताल जैसी यात्राओं में शामिल होते रहे हैं, लेकिन इस तरह का विवाद पहली बार सामने आया है।
गंगोत्री से डोली लौटने के बाद गांव में पंचायत भी आयोजित की गई। पंचायत में यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में होने वाले सार्वजनिक आयोजनों में सभी समुदायों की समान भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
उत्तरकाशी पहुंचे ग्रामीणों का कहना था कि समाज में इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उनका कहना है कि संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है और धार्मिक आयोजनों में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि देवभूमि की पहचान उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक एकता से है, ऐसे में समाज को बांटने वाली घटनाओं से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
उत्तरकाशी और आसपास के क्षेत्रों में इससे पहले भी सामाजिक भेदभाव से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2023 में मोरी ब्लॉक के बनौल गांव में मंदिर प्रवेश को लेकर एक युवक के साथ मारपीट का मामला चर्चा में आया था।
इसके अलावा वर्ष 2019 में टिहरी जिले में शादी समारोह के दौरान भोजन व्यवस्था को लेकर हुए विवाद में एक युवक की मौत हो गई थी। उस मामले में पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।