Temple Donation – बदरीनाथ चढ़ावा मामले में जांच तेज, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
Temple Donation – बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया है कि एक कर्मचारी कई अवसरों पर दान गणना कक्ष से सामग्री बाहर ले जाता हुआ सीसीटीवी कैमरों में दिखाई दिया। इसके बावजूद लंबे समय तक इस गतिविधि पर न तो किसी स्तर पर आपत्ति दर्ज की गई और न ही समय रहते कार्रवाई की गई। अब इस पूरे मामले में जांच आगे बढ़ रही है।

जांच रिपोर्ट में सामने आए अहम तथ्य
जांच समिति के अनुसार उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में संबंधित कर्मचारी की गतिविधियां स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। रिपोर्ट से यह भी संकेत मिलता है कि यदि इस तरह की घटनाएं लगातार होती रहीं, तो निगरानी व्यवस्था में गंभीर कमी रही होगी। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि कैमरों की नियमित समीक्षा क्यों नहीं की गई और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते मामले पर ध्यान क्यों नहीं दिया।
बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि विस्तृत जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उसके प्रत्येक बिंदु का परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तारी नहीं होने पर भी उठे सवाल
मामले में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बावजूद अब तक आरोपी कर्मचारी की गिरफ्तारी नहीं होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियों ने अभी तक उससे औपचारिक पूछताछ भी नहीं की है। जबकि जांच में सीसीटीवी फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। ऐसे में कार्रवाई की गति को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है।
ड्रेस कोड को लेकर शुरू हुई बहस
इस प्रकरण के बीच मंदिर में दान की गणना करने वाले लोगों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते का प्रस्ताव भी चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुजारी, पंडा और ब्राह्मण समाज के लोगों पर श्रद्धालुओं का वर्षों से विश्वास रहा है। उनका कहना था कि यदि किसी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध है तो नियम उसी वर्ग के कर्मचारियों के लिए बनाए जाने चाहिए, न कि सभी पर समान रूप से लागू किए जाएं।
कांग्रेस ने बयान पर जताई आपत्ति
महेंद्र भट्ट के बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने असहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी अपराध को जाति या धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार कानून सभी के लिए समान है और जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहती है तो जिम्मेदार पदों पर बैठे सभी लोगों के लिए स्पष्ट और समान नियम बनाए जाने चाहिए।
देवस्थानम बोर्ड पर भी बढ़ी राजनीतिक चर्चा
इसी दौरान चारधाम देवस्थानम बोर्ड को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हालिया बयान पर भी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। देवप्रयाग में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि तीर्थ पुरोहितों और पारंपरिक हकधारियों की सहमति के बिना इस विषय पर कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। फिलहाल चढ़ावा मामले की जांच और उससे जुड़े प्रशासनिक निर्णयों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।