उत्तराखण्ड

TETExam – उत्तराखंड में पुराने शिक्षकों को टीईटी नियमों में मिली राहत

TETExam – उत्तराखंड सरकार ने राज्य के हजारों शिक्षकों को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा विभाग अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से जुड़े नियमों में संशोधन करने जा रहा है, जिससे वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हुए बेसिक और जूनियर स्तर के शिक्षकों को बड़ी सुविधा मिल सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और अब विभाग इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है।

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नई व्यवस्था का उद्देश्य उन शिक्षकों को अवसर देना है जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले हुई थी और जो वर्तमान नियमों के कारण टीईटी पात्रता को लेकर असमंजस की स्थिति में थे। शिक्षा विभाग का मानना है कि संशोधित प्रावधान से बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों को लाभ मिलेगा।

टीईटी को लेकर जल्द जारी होंगे नए दिशा-निर्देश

शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार टीईटी से संबंधित नियमों को अधिक व्यावहारिक और स्पष्ट बनाने के लिए व्यापक संशोधन किए जा रहे हैं। विभाग जल्द ही नया शासनादेश जारी करेगा, जिसमें पात्रता, आवेदन और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया जाएगा।

इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि राज्य में हर वर्ष कम से कम दो बार टीईटी आयोजित किया जाएगा। यदि आवश्यकता महसूस हुई तो परीक्षा की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। इससे अभ्यर्थियों और सेवारत शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया कदम

शिक्षा विभाग का कहना है कि टीईटी को लेकर देशभर में लागू नियम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी शिक्षकों को आवश्यक पात्रता मानकों को पूरा करना होगा।

विभाग के अनुसार 31 अगस्त 2028 तक सभी शिक्षकों को आवश्यक शैक्षणिक और पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी। इसी कारण राज्य सरकार ने ऐसे शिक्षकों के लिए नियमों को सरल बनाने का निर्णय लिया है जो लंबे समय से सेवा में हैं लेकिन वर्तमान पात्रता मानकों में तकनीकी अड़चनों का सामना कर रहे हैं।

हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव

राज्य में लगभग 20 हजार शिक्षक ऐसे बताए जा रहे हैं जिनकी नियुक्ति वर्ष 2010 से पहले हुई थी और जो नए नियमों के दायरे में आते हैं। इन शिक्षकों के लिए टीईटी पात्रता संबंधी संशोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि बहुत कम बची है, उन्हें कुछ परिस्थितियों में राहत मिल सकती है। लेकिन यदि वे पदोन्नति का लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें भी निर्धारित पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। विभाग का लक्ष्य सभी शिक्षकों को समान मानकों के अनुरूप लाना है।

बीएड और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों को भी फायदा

मौजूदा नियमों में टीईटी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए कुछ विशेष शैक्षणिक योग्यताएं निर्धारित हैं। लेकिन राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं जिनकी नियुक्ति पुराने नियमों के आधार पर बीएड या विशिष्ट प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के जरिए हुई थी।

नए संशोधन के बाद ऐसे शिक्षकों को भी टीईटी में शामिल होने का अवसर मिलने की संभावना है। इससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की पात्रता संबंधी समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उन्हें भविष्य की प्रशासनिक एवं पदोन्नति प्रक्रियाओं में सुविधा मिलेगी।

शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि टीईटी को लेकर किए जा रहे बदलाव शिक्षा प्रणाली में एकरूपता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे सभी शिक्षकों के लिए समान पात्रता मानक लागू होंगे और शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।

राज्य सरकार का कहना है कि शिक्षक हितों और न्यायिक निर्देशों के बीच संतुलन बनाते हुए यह निर्णय लिया गया है। संशोधित नियम लागू होने के बाद शिक्षकों को परीक्षा प्रक्रिया में भाग लेने और निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक योग्यता प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

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