उत्तराखण्ड

UrbanCooperativeBank – आरबीआई की रोक से 124 करोड़ अटके

UrbanCooperativeBank – देहरादून के अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लेन-देन पर अस्थायी रोक लगाए जाने के बाद शहर में चिंता का माहौल है। इस फैसले से बैंक के लगभग नौ हजार खाताधारकों की करीब 124 करोड़ रुपये की जमा राशि फिलहाल अटकी हुई है। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्राहक दर्शन लाल चौक स्थित मुख्य शाखा पहुंचे और अपनी रकम को लेकर स्पष्ट जानकारी की मांग की। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस को बुलाना पड़ा।

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प्रतिबंध के बाद बढ़ी चिंता

आरबीआई ने जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा और जनहित का हवाला देते हुए छह महीने के लिए बैंक की गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। जैसे ही यह सूचना सार्वजनिक हुई, ग्राहकों के बीच अपनी बचत को लेकर असमंजस बढ़ गया। सोमवार से ही लोग बैंक पहुंचने लगे थे, लेकिन मंगलवार को भीड़ अधिक रही।

ग्राहकों का कहना था कि उन्हें अपने पैसों की जरूरत है, जबकि बैंक की ओर से तत्काल भुगतान संभव नहीं बताया गया। बैंक प्रबंधन के वरिष्ठ पदाधिकारी शाखा में मौजूद नहीं थे, जिससे नाराजगी और बढ़ी।

चेक भुगतान न होने पर विवाद

मंगलवार को संजीव वर्मा नामक खाताधारक 96 हजार रुपये का चेक लेकर बैंक पहुंचे। कर्मचारियों ने भुगतान असंभव बताते हुए चेक लौटाया तो वहां बहस हो गई। अन्य ग्राहक भी इसी तरह की समस्या से जूझ रहे थे।

कई लोगों ने बताया कि उनकी जमा पूंजी दैनिक जरूरतों, इलाज या व्यापारिक भुगतान के लिए आवश्यक है। अचानक आई रोक ने उन्हें असहज स्थिति में डाल दिया है।

ठेकेदारों के भुगतान पर असर

बैंक में कई निर्माण ठेकेदारों के खाते भी संचालित हैं। अनुमान है कि लगभग 60 करोड़ रुपये ठेकेदारों के खातों में जमा हैं। भुगतान रुकने से मजदूरों की मजदूरी और अन्य कार्यों पर असर पड़ रहा है।

कुछ ठेकेदारों ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो परियोजनाओं की गति प्रभावित होगी। वे प्रशासन से स्पष्ट समयसीमा की मांग कर रहे हैं।

बैंक अध्यक्ष का बयान

बैंक के अध्यक्ष मयंक ममगाईं ने कहा कि वर्ष 2013-14 में कुछ वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए थे, जिनकी जांच प्रक्रिया जारी है। उनके अनुसार, आरबीआई का निर्णय अस्थायी है और जमाकर्ताओं की पूंजी सुरक्षित है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही नियामक संस्था से दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, बैंकिंग गतिविधियां फिर से शुरू कर दी जाएंगी। अध्यक्ष ने ग्राहकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

ग्राहकों का कहना है कि उनकी जीवनभर की कमाई बैंक में जमा है और उन्हें स्पष्ट जानकारी चाहिए। हंगामे के दौरान पुलिस की मौजूदगी में बैंक अध्यक्ष से फोन पर बातचीत कराई गई। अध्यक्ष ने बुधवार दोपहर बाद ग्राहकों से मिलकर स्थिति स्पष्ट करने का भरोसा दिया, जिसके बाद भीड़ धीरे-धीरे छंट गई।

ग्राहक अचिन गुप्ता सहित कुछ अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि पुराने वित्तीय मामलों को पर्याप्त पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक नहीं किया गया। उनका कहना है कि वर्षों से ऑडिट होते रहे, लेकिन अब अचानक प्रतिबंध लगना कई सवाल खड़े करता है।

फिलहाल बैंकिंग गतिविधियों पर रोक जारी है और ग्राहक समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रशासन और नियामक संस्थाओं की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

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