Uttarakhand Politics – कोटद्वार प्रकरण में पुलिस कार्रवाई पर ओवैसी ने उठाए सवाल
Uttarakhand Politics – उत्तराखंड के कोटद्वार में हाल ही में सामने आए विवाद को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज हो गई हैं। लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस युवक को लेकर विवाद हुआ, उससे मिलने तक की अनुमति मीडिया को नहीं दी जा रही है। ओवैसी का कहना है कि यदि किसी ने कोई गंभीर अपराध नहीं किया है, तो फिर उससे संवाद में इस तरह की रोक क्यों लगाई जा रही है।

कोटद्वार में यह पूरा मामला एक कपड़ों की दुकान के नाम को लेकर शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे सामाजिक तनाव का कारण बन गया। ओवैसी ने इस घटना को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि दीपक कुमार नाम के एक स्थानीय जिम संचालक से मिलने के लिए जब पत्रकार उसके घर पहुँचे, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। ओवैसी ने पूछा कि आखिर पुलिस किस आधार पर मीडिया को रोक रही है। उन्होंने कहा कि यदि युवक ने कोई गंभीर अपराध नहीं किया है, तो उसे सार्वजनिक रूप से सामने आने से क्यों रोका जा रहा है।
ओवैसी के अनुसार, दीपक का जुर्म सिर्फ इतना था कि वह एक बुजुर्ग दुकानदार के समर्थन में खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और किसी के पक्ष में खड़ा होना अपराध नहीं हो सकता।
दुकान के नाम से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद कोटद्वार की एक कपड़ों की दुकान के नाम ‘बाबा’ को लेकर सामने आया। स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ताओं का आरोप था कि इस नाम से शहर के प्रसिद्ध सिद्धबली हनुमान मंदिर को लेकर भ्रम पैदा होता है। इसी आधार पर दुकानदार मोहम्मद शोएब पर दुकान का नाम बदलने का दबाव बनाया जा रहा था।
पिछले सप्ताह बुधवार को बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने दुकान के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान दुकानदार और उसके मित्र दीपक कुमार के साथ उनकी कहासुनी हो गई, जो बाद में हाथापाई में बदल गई।
दीपक कुमार की भूमिका और आरोप
झड़प के दौरान दीपक कुमार ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से दुकान के बाहर से हटने को कहा। आरोप है कि दीपक ने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताते हुए विरोध कर रहे लोगों को वहां से जाने पर मजबूर किया। इस घटना के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
ओवैसी ने कहा कि दीपक पिछले करीब 20 वर्षों से उसी इलाके में जिम चला रहा है और उसने सिर्फ एक गरीब दुकानदार की मदद की। उनके मुताबिक, इसके बावजूद पुलिस ने उसी पर मामला दर्ज कर दिया, जबकि विवाद की शुरुआत नाम बदलने के दबाव से हुई थी।
दोबारा प्रदर्शन और सड़क जाम
पहली घटना के कुछ दिन बाद शनिवार को बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता एक बार फिर दुकान और दीपक कुमार के जिम के बाहर प्रदर्शन करने पहुँचे। इस दौरान नारेबाजी हुई और सड़क जाम कर दी गई। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते किसी बड़े टकराव की स्थिति नहीं बनी।
पुलिस बल की मौजूदगी के कारण हालात काबू में रहे, लेकिन तनाव साफ तौर पर देखा गया। स्थानीय लोगों के बीच भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आईं।
पुलिस कार्रवाई और शांति बैठक
बवाल के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए। रविवार को शहर का सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में 30 से 40 अज्ञात लोगों समेत कुछ अन्य व्यक्तियों के खिलाफ तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए।
इसके बाद सोमवार को कोटद्वार थाने में एक शांति बैठक आयोजित की गई, जिसमें पार्षदों, व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों और मुस्लिम समाज के लोगों ने भाग लिया। अपर पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह के अनुसार, शहर में हालात नियंत्रण में हैं और शांति बनाए रखने के लिए सभी वर्गों से संवाद किया जा रहा है।
मौजूदा स्थिति और आगे की चुनौती
फिलहाल कोटद्वार में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन यह मामला प्रशासन के लिए एक परीक्षा बना हुआ है। राजनीतिक बयानबाजी और सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव है। स्थानीय स्तर पर यह अपेक्षा की जा रही है कि कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटे स्थानीय विवाद किस तरह तेजी से बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों का रूप ले लेते हैं।



