उत्तराखण्ड

VoterList – उत्तराखंड की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी, कम हुए 8.26 लाख नाम

VoterList – उत्तराखंड में आगामी चुनावों की तैयारियों के तहत चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के पहले चरण के बाद निर्वाचन विभाग ने नई ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस सूची के अनुसार प्रदेश में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक संशोधित सूची में करीब 8.27 लाख मतदाता पहले की तुलना में कम हो गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में मतदाताओं के विवरण में भी विसंगतियां सामने आई हैं।

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मतदाता संख्या में आई बड़ी कमी

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया से पहले संभावित मतदाताओं की संख्या 79.60 लाख से अधिक थी। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद यह घटकर लगभग 71.34 लाख रह गई है। इस प्रकार कुल 8,26,977 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हुए हैं। विभाग का कहना है कि यह प्रारंभिक सूची है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे एवं आपत्तियों के बाद इसमें आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

19 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में मिली विसंगति

पुनरीक्षण के दौरान करीब 19 लाख मतदाताओं के विवरण में विभिन्न प्रकार की त्रुटियां पाई गई हैं। निर्वाचन विभाग इन मामलों में संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के माध्यम से नोटिस जारी करेगा। संबंधित मतदाता आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने रिकॉर्ड का सत्यापन और सुधार करा सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि पात्र मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

बढ़ाई गई मतदान केंद्रों की संख्या

निर्वाचन विभाग ने प्रशासनिक सुविधा और मतदाताओं की पहुंच बेहतर बनाने के उद्देश्य से मतदान केंद्रों की संख्या भी बढ़ा दी है। पहले जहां प्रदेश में 11,733 मतदान केंद्र थे, अब उनकी संख्या बढ़ाकर 12,543 कर दी गई है। विभाग ने बताया कि 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक मतदाता Form 6, Form 7 और Form 8 के माध्यम से नया नाम जुड़वाने, नाम हटाने अथवा विवरण में संशोधन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

किन कारणों से सामने आईं गड़बड़ियां

निर्वाचन आयोग के अनुसार डेटा मिलान के दौरान कई तरह की विसंगतियां सामने आईं। इनमें मतदाता या उसके अभिभावक के नाम में अंतर, आयु संबंधी असंगति, पारिवारिक विवरण का मेल न खाना तथा पूर्व मतदाता सूची से रिकॉर्ड का सही तरीके से न जुड़ना जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच की जाएगी और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

जिलावार स्थिति और सुधार प्रक्रिया

आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक विसंगतियां देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जिलों में दर्ज की गई हैं, जबकि चमोली और अल्मोड़ा में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। राज्यभर में 70 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और लगभग 800 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी इस प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। मतदाताओं की सुविधा के लिए न्याय पंचायत, तहसील, नगर निकाय और वार्ड स्तर पर विशेष शिविर भी आयोजित किए जाएंगे, जहां दस्तावेजों का सत्यापन कर तत्काल सुधार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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