Jharkhand Municipal Elections 2026: कम समय में मतदान से लेकर मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया होगी संपन्न
Jharkhand Municipal Elections 2026: राज्य निर्वाचन आयोग ने झारखंड में नगर निकाय चुनावों के लिए बिगुल फूंक दिया है। इस बार की चुनावी प्रक्रिया अपनी गति और सुव्यवस्थित योजना के कारण चर्चा में है। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि वर्ष 2026 की यह चुनावी कवायद पिछले चुनावों की तुलना में काफी तेजी से पूरी की जा रही है। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य कम से कम समय में पारदर्शी और निष्पक्ष मतदान संपन्न कराना है, जिसके लिए तिथियों का निर्धारण बेहद सघन तरीके से किया गया है।

पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार अधिक तत्परता
निर्वाचन आयोग की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2018 के मुकाबले इस बार चुनाव प्रक्रिया की अवधि में कटौती की गई है। 2018 में अधिसूचना जारी होने से लेकर मतगणना तक कुल 36 दिनों का समय लगा था। उस समय 15 मार्च को अधिसूचना जारी हुई थी और 20 अप्रैल को नतीजे आए थे। इसके उलट, 2026 में अधिसूचना 27 जनवरी को जारी की जा चुकी है और 27 फरवरी तक मतगणना के साथ परिणाम भी सामने आ जाएंगे। इस प्रकार पूरी प्रक्रिया महज 32 दिनों के भीतर सिमट जाएगी, जो प्रशासनिक कुशलता का एक उदाहरण है।
नामांकन और संवीक्षा के लिए निर्धारित हुआ सख्त शेड्यूल
चुनावी शेड्यूल के अनुसार, उम्मीदवारों के पास नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए बहुत सीमित समय है। जहां 2018 में यह प्रक्रिया सात दिनों तक चली थी, वहीं इस बार 29 जनवरी से 4 फरवरी के बीच ही नामांकन स्वीकार किए जा रहे हैं। इसके तुरंत बाद संवीक्षा, नाम वापसी और प्रतीकों के आवंटन की प्रक्रिया को भी बिना किसी लंबे अंतराल के पूरा करने की योजना है। आयोग का मानना है कि प्रक्रियाओं को सघन करने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आदर्श चुनाव आचार संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी।
अनुसूचित क्षेत्रों में चुनाव पर संवैधानिक सवाल और विरोध
एक ओर जहां चुनावी तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में इस पर विरोध के स्वर भी मुखर हो रहे हैं। आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका चुनाव कराने के निर्णय को चुनौती दी है। मंच के राष्ट्रीय संयोजक विक्टर कुमार मालतो ने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को पत्र सौंपकर इन चुनावों पर रोक लगाने की मांग की है। उनका तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 243 (जेडसी) के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका के प्रावधान लागू करने से पहले संसद द्वारा विशेष विस्तार की आवश्यकता होती है, जो फिलहाल लंबित है।
कानूनी पेच और उच्च न्यायालय में आगामी सुनवाई
यह मामला अब कानूनी गलियारों में भी पहुंच चुका है। झारखंड उच्च न्यायालय में अनुसूचित क्षेत्रों की 22 नगरपालिकाओं की संवैधानिकता को लेकर 11 मार्च को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। गौर करने वाली बात यह है कि राज्य सरकार को इस विषय पर 23 फरवरी 2026 को अपना पक्ष रखना है, जबकि उसी दिन मतदान की तिथि भी निर्धारित है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं का कहना है कि न्यायिक स्पष्टता आने से पहले चुनाव कराना संवैधानिक प्रक्रियाओं के साथ सामंजस्य नहीं रखता।
रांची नगर निगम: महिला और युवा वोटर्स की भूमिका अहम
राजधानी रांची की बात करें तो यहां चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प नजर आ रहे हैं। रांची नगर निगम के 53 वार्डों में इस बार बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा और मानवीय सरोकार बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो निगम क्षेत्र में कुल 10,27,723 मतदाता हैं। इनमें पुरुषों की संख्या 5,18,695 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 5,08,971 है। पुरुष और महिला मतदाताओं के बीच का यह न्यूनतम अंतर यह स्पष्ट करता है कि इस बार शहर की सरकार चुनने में महिलाओं की भूमिका निर्णायक होगी।
सड़क और नाली से आगे बढ़कर मुद्दों पर होगी वोटिंग
स्थानीय नागरिकों और युवाओं से मिली प्रतिक्रिया के अनुसार, अब मतदाता केवल पारंपरिक मुद्दों जैसे सड़क, बिजली और नाली तक सीमित नहीं रहना चाहते। युवा वर्ग रोजगार, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और भ्रष्टाचार मुक्त निगम प्रशासन की मांग कर रहा है। मतदाताओं का मानना है कि महिला सुरक्षा और शिक्षा जैसे विषय भी इस बार प्रत्याशियों की जीत-हार तय करेंगे। यदि युवा और महिला मतदाता एकजुट होकर वोट करते हैं, तो रांची नगर निगम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।