SproutsNutrition – रोजाना स्प्राउट्स खाने से पहले जान लें ये जरूरी सावधानियां
SproutsNutrition – नाश्ते में पौष्टिक भोजन चुनने की कोशिश करने वाले कई लोग स्प्राउट्स को अपनी डाइट में शामिल करते हैं। खासकर शाकाहारी भोजन लेने वाले लोग इसे प्रोटीन और पोषण का अच्छा स्रोत मानते हैं। अंकुरित अनाज को हेल्दी माना जाता है क्योंकि इसमें विटामिन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। हालांकि पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि स्प्राउट्स का सेवन करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। सही तरीके से न खाए जाने पर यह पेट से जुड़ी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन ने भी हाल ही में साझा जानकारी में बताया कि स्प्राउट्स को लेकर कई सामान्य गलतफहमियां हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।

कच्चे स्प्राउट्स खाने से बचने की सलाह
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार स्प्राउट्स तैयार करने के लिए दाल या अनाज को गर्म और नमी वाली स्थिति में अंकुरित किया जाता है। यही वातावरण कुछ प्रकार के बैक्टीरिया के पनपने के लिए भी अनुकूल होता है। ऐसे में यदि अंकुरित दाने संक्रमित हो जाएं तो उनमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि केवल पानी से धोने से इन बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं होता। यदि ऐसे स्प्राउट्स कच्चे ही खा लिए जाएं तो इससे पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है।
सुरक्षित तरीके से सेवन करने की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्प्राउट्स खाने से पहले उन्हें हल्का पकाना या भाप में गर्म करना बेहतर विकल्प माना जाता है। ऐसा करने से संभावित बैक्टीरिया नष्ट हो सकते हैं और इन्हें खाना अपेक्षाकृत सुरक्षित हो जाता है।
हल्का उबालने या स्टीम करने के बाद इन्हें सलाद, चाट या अन्य व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है। इससे स्वाद के साथ पोषण भी बना रहता है और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
प्रोटीन का मुख्य स्रोत मानना सही नहीं
कई लोग यह मान लेते हैं कि स्प्राउट्स प्रोटीन का बहुत बड़ा स्रोत हैं। लेकिन पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि 100 ग्राम स्प्राउट्स में लगभग तीन से चार ग्राम तक ही प्रोटीन पाया जाता है।
इस वजह से इसे अकेले प्रोटीन का मुख्य स्रोत मानना उचित नहीं है। संतुलित आहार के लिए अन्य खाद्य पदार्थों को भी डाइट में शामिल करना जरूरी है। जैसे चना, दाल, पनीर, टोफू और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को पर्याप्त प्रोटीन देने में मदद करते हैं।
कुछ लोगों में पेट से जुड़ी समस्या बढ़ा सकता है
स्प्राउट्स में फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। सामान्य रूप से यह पाचन के लिए लाभकारी माना जाता है, लेकिन कुछ लोगों में यह गैस, पेट फूलने या असहजता का कारण भी बन सकता है।
खासतौर पर जिन लोगों को संवेदनशील पाचन तंत्र या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्या होती है, उन्हें इसे सीमित मात्रा में लेना चाहिए। ऐसे लोगों को अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
स्प्राउट्स को सुरक्षित रखने का तरीका
स्प्राउट्स को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखना उचित नहीं माना जाता। इन्हें तैयार करने के बाद फ्रिज में रखना बेहतर होता है ताकि बैक्टीरिया की वृद्धि को कुछ हद तक धीमा किया जा सके।
हालांकि ठंडा रखने से बैक्टीरिया पूरी तरह समाप्त नहीं होते, इसलिए इन्हें लंबे समय तक स्टोर करने से बचना चाहिए। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार तैयार किए गए स्प्राउट्स को 24 से 48 घंटे के भीतर उपयोग कर लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
संतुलित और सुरक्षित सेवन जरूरी
स्प्राउट्स पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थों में शामिल हैं और संतुलित मात्रा में सेवन करने पर यह डाइट का अच्छा हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन सही तरीके से तैयार करना और सुरक्षित रूप से खाना उतना ही जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी भोजन को संतुलित मात्रा में और सही तरीके से खाना ही स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर होता है। इसलिए स्प्राउट्स को भी सोच-समझकर और सुरक्षित तरीके से डाइट में शामिल करना चाहिए।



