SecurityOperation – विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी से उजागर हुआ बड़ा नेटवर्क
SecurityOperation – भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक अहम अभियान में सात विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है, जिन पर देशविरोधी गतिविधियों से जुड़ी साजिश रचने के आरोप लगे हैं। इनमें छह नागरिक यूक्रेन के और एक अमेरिका का बताया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, ये सभी लोग भारत के संवेदनशील क्षेत्रों में गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल थे और सीमा पार नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया और स्थान
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने इस ऑपरेशन को कई शहरों में एक साथ अंजाम दिया। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक को कोलकाता हवाई अड्डे से पकड़ा गया, जबकि छह यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई पहले से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी। गिरफ्तार किए गए यूक्रेनी नागरिकों में पेट्रो हुर्बा, तारास स्लीवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव, मैक्सिम होनचारुक और विक्टर कामिंस्की शामिल हैं। सभी को दिल्ली लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से उनकी रिमांड अवधि बढ़ाई गई है।
कानूनी कार्रवाई और आरोपों का दायरा
जांच एजेंसी ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उन पर आतंकवादी साजिश में शामिल होने, प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध रूप से प्रवेश करने और सीमा पार गतिविधियों में भागीदारी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने शुरुआती रिमांड के बाद उनकी हिरासत को आगे बढ़ाते हुए जांच एजेंसियों को और समय दिया है, ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
मिजोरम और म्यांमार सीमा से जुड़ी गतिविधियां
जांच में सामने आया है कि ये सभी विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे और गुवाहाटी के रास्ते मिजोरम पहुंचे। वहां से बिना आवश्यक अनुमति, जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट या संरक्षित क्षेत्र परमिट के, उन्होंने आगे की यात्रा की। आरोप है कि इसके बाद इन्होंने अवैध रूप से म्यांमार की सीमा पार की। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह गतिविधियां योजनाबद्ध तरीके से की गई थीं और इनके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई के आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने म्यांमार के कुछ सशस्त्र समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया। इसमें ड्रोन संचालन, असेंबली और संचार बाधित करने जैसी तकनीकों की जानकारी शामिल थी। इसके अलावा, यूरोप से मंगाए गए ड्रोन उपकरणों की खेप को मिजोरम के रास्ते म्यांमार भेजने का भी आरोप है। एजेंसियों का मानना है कि इन गतिविधियों से क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता था, इसलिए मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और राजनयिक पक्ष
इस मामले पर अमेरिका और यूक्रेन दोनों ने प्रतिक्रिया दी है। भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी है, लेकिन गोपनीयता नियमों के चलते वे विस्तृत टिप्पणी नहीं कर सकते। वहीं यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि वे लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संबंधित परिवारों के संपर्क में हैं। दोनों देशों की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारतीय एजेंसियां अपने स्तर पर जांच कर रही हैं।
पूछताछ में सामने आए शुरुआती संकेत
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों से कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, वे ऐसे लोगों के संपर्क में थे जो हथियारों के साथ सक्रिय थे और क्षेत्र में गतिविधियां चला रहे थे। आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया है कि उन्होंने बिना जरूरी अनुमति के यात्रा की और सीमा पार जाकर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच अभी जारी है।
डिजिटल जांच और आगे की कार्रवाई
एजेंसियों ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिन्हें तकनीकी विश्लेषण के लिए भेजा गया है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और फंडिंग का स्रोत क्या था। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कुछ अन्य संदिग्ध भी हो सकते हैं, जिनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।



