उत्तर प्रदेश

PlasticPriceRise – कच्चे माल की महंगाई से पानी उद्योग पर संकट गहराया

PlasticPriceRise – खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का असर अब देश के स्थानीय बाजारों तक पहुंचने लगा है। प्रयागराज में प्लास्टिक कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने पानी के कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई छोटे और मध्यम स्तर के वाटर प्लांट संचालन में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। पहले जहां जीएसटी में बदलाव के बाद बोतलबंद पानी के दामों में कुछ राहत मिली थी, वहीं अब बढ़ती लागत ने कीमतों को फिर पुराने स्तर तक पहुंचा दिया है।

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कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल

स्थानीय उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पीवीसी और पीईटी जैसे प्लास्टिक कच्चे माल के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उद्यमियों के अनुसार, पीवीसी की कीमतों में प्रति किलो करीब 40 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पीईटी की लागत भी तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ा है, जिससे छोटे कारोबारियों के लिए काम जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।

वाटर प्लांट संचालकों की बढ़ी परेशानी

प्रयागराज के एक वाटर प्लांट संचालक ने बताया कि पहले जो कच्चा माल 114 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 175 रुपये तक पहुंच चुका है। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण पानी की एक पेटी का दाम 75 रुपये से बढ़ाकर 90 रुपये करना पड़ा, लेकिन बाजार में ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। उन्होंने कहा कि मामूली मुनाफे पर भी बिक्री करना कठिन हो गया है, जिसके चलते उनका प्लांट पिछले कुछ दिनों से बंद पड़ा है और मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा।

छोटे उत्पादों पर भी असर स्पष्ट

महंगाई का असर केवल बड़ी इकाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे उत्पादों की कीमतों में भी साफ दिख रहा है। बोतलों के ढक्कन, जो पहले 20 पैसे में मिलते थे, अब 40 पैसे तक पहुंच गए हैं और इसके बावजूद बाजार में इनकी उपलब्धता सीमित है। इससे उत्पादन प्रक्रिया में और बाधा आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि प्लास्टिक से जुड़े लगभग सभी उत्पादों के दाम बढ़ गए हैं।

बोतलबंद पानी के दामों में बदलाव

शहर के व्यापारियों के अनुसार, कुछ समय पहले तक पानी की बोतलों के दाम कम हुए थे, लेकिन अब कंपनियों ने फिर से कीमतें बढ़ा दी हैं। 10 रुपये में मिलने वाली बोतल अब फिर उसी कीमत पर लौट आई है, जबकि दो लीटर की बोतल के दाम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पानी की पेटियों की कीमत में भी लगभग 10 रुपये तक की वृद्धि हुई है, जिससे थोक और खुदरा दोनों बाजार प्रभावित हुए हैं।

अन्य जरूरी वस्तुओं पर भी असर

प्लास्टिक की कीमतों में उछाल का असर अन्य रोजमर्रा के सामानों पर भी पड़ रहा है। बाजार में प्लास्टिक के बर्तन, बाल्टी और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुओं के दाम करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसके साथ ही खाद्य तेल जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में भी वृद्धि देखी जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

स्थानीय रोजगार पर बढ़ता दबाव

उद्योग में आई इस मंदी का असर रोजगार पर भी दिखाई देने लगा है। कई छोटे प्लांट बंद होने की कगार पर हैं, जिससे कामगारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता नहीं आई, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

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