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TribalRights – राहुल गांधी ने ‘वनवासी’ शब्द पर उठाए सवाल, BJP पर साधा निशाना

TribalRights – कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आदिवासी समुदाय को लेकर इस्तेमाल होने वाले शब्दों पर एक बार फिर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ‘वनवासी’ शब्द के उपयोग पर भाजपा और आरएसएस की आलोचना करते हुए कहा कि यह शब्द आदिवासियों की पहचान और उनके अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश है। उनके मुताबिक, इस तरह की शब्दावली से जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को नजरअंदाज किया जाता है।

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‘आदिवासी’ शब्द की व्याख्या और ऐतिहासिक संदर्भ
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘आदिवासी’ शब्द का अर्थ देश के मूल निवासियों से है, जिनका इस भूमि पर सदियों से अधिकार रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इतिहास में पीछे जाकर देखा जाए तो देश की बड़ी हिस्सेदारी पर आदिवासी समुदाय का नियंत्रण था। उनके अनुसार, इस पहचान को बदलने की कोशिश न केवल सामाजिक दृष्टि से बल्कि संवैधानिक रूप से भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

‘वनवासी’ शब्द पर आपत्ति और राजनीतिक आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ‘वनवासी’ शब्द एक विचारधारा के तहत गढ़ा गया है, जिससे यह संदेश दिया जाता है कि आदिवासी इस भूमि के मूल स्वामी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस शब्द के इस्तेमाल से यह धारणा बनती है कि आदिवासी केवल जंगलों में रहने वाले लोग हैं, जबकि वास्तविकता इससे कहीं व्यापक है। राहुल गांधी ने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया।

बिरसा मुंडा और संविधान का जिक्र
अपने भाषण में उन्होंने आदिवासी नेता बिरसा मुंडा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके विचारों और संघर्ष को सही मायनों में समझने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में समानता और अधिकारों की जो भावना है, वह आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ी हुई है। उनके अनुसार, किसी भी शब्द या नीति से यदि यह भावना कमजोर होती है, तो उसे गंभीरता से देखने की जरूरत है।

जाति जनगणना की मांग दोहराई
राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान जाति जनगणना की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होगा कि देश के विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक आबादी कितनी है और उन्हें संसाधनों व अवसरों में कितना हिस्सा मिल रहा है। उनके अनुसार, नीति निर्माण के लिए यह जानकारी जरूरी है ताकि सभी वर्गों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिल सके।

आर्थिक नीतियों और व्यापार समझौतों पर सवाल
उन्होंने अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौतों को लेकर भी चिंता जताई। राहुल गांधी ने कहा कि यदि बड़े पैमाने पर विदेशी उत्पाद भारतीय बाजार में आते हैं, तो इसका असर छोटे किसानों और स्थानीय उद्योगों पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बड़े आयात के चलते घरेलू उत्पादन और रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

राजनीतिक बयान से बढ़ी बहस
राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जहां कांग्रेस इसे आदिवासी अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा की ओर से अब तक इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा बन सकता है।

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