Geopolitics – पीएम मोदी के इजरायल दौरे पर उठे सवालों पर सरकार का जवाब स्पष्ट
Geopolitics – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी में हुई इजरायल यात्रा को लेकर संसद में उठे सवालों पर सरकार ने विस्तृत जवाब दिया है। राज्यसभा में यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब कुछ सदस्यों ने यह जानना चाहा कि क्या भारत सरकार को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए जाने वाले सैन्य हमले की पहले से कोई जानकारी थी। सरकार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए साफ किया कि यात्रा के दौरान इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।

संसद में उठे सवाल और सरकार की प्रतिक्रिया
केरल से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद अब्दुल वहाब ने विदेश मंत्रालय से इस यात्रा से जुड़े कई पहलुओं पर जानकारी मांगी। उन्होंने खास तौर पर पूछा कि प्रधानमंत्री की 25-26 फरवरी की यात्रा के दौरान भारत और इजरायल के बीच किन-किन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए और क्या उस समय ईरान पर संभावित हमले की कोई सूचना भारत के पास थी।
इस पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर यह राजकीय दौरा किया था। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक बातचीत हुई, लेकिन ईरान पर किसी संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।
किन क्षेत्रों में हुए समझौते
सरकार के अनुसार, इस यात्रा के दौरान भारत और इजरायल के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं और डिजिटल भुगतान जैसे सेक्टर शामिल हैं। इसके अलावा श्रमिकों की आवाजाही को लेकर भी समझौते हुए, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।
सरकार ने यह भी दोहराया कि इन सभी समझौतों का फोकस द्विपक्षीय विकास और सहयोग बढ़ाने पर था, न कि किसी सैन्य रणनीति या तीसरे देश से जुड़े मामलों पर।
हमले के समय को लेकर उठी जिज्ञासा
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के ठीक एक दिन बाद, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले की खबर सामने आई थी। इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया और संघर्ष लगातार जारी है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक था कि क्या इस कार्रवाई की जानकारी पहले से किसी सहयोगी देश को दी गई थी।
हालांकि, सरकार ने संसद में यह स्पष्ट किया कि इस तरह की कोई पूर्व सूचना भारत को नहीं दी गई थी और न ही यात्रा के दौरान इस पर कोई चर्चा हुई थी।
इजरायल ने भी अटकलों को किया खारिज
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि इजरायल की ओर से भी इन दावों को खारिज किया गया है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान इस सैन्य कार्रवाई का निर्णय लिया ही नहीं गया था। उनके अनुसार, यह फैसला बाद में लिया गया, जब अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल हो गई।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और इजरायल के बीच मजबूत और भरोसेमंद संबंध हैं, लेकिन उस समय ऐसी कोई परिस्थिति नहीं थी जिसमें इस तरह की संवेदनशील जानकारी साझा की जा सके। सार ने यह भी उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच भविष्य में संबंधों को और गहरा करने के लिए व्यापक योजना तैयार की जा रही है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत की स्थिति
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाए हुए है। भारत के लिए इजरायल और ईरान दोनों ही महत्वपूर्ण साझेदार हैं, इसलिए किसी भी पक्ष में खुलकर झुकाव दिखाने के बजाय भारत कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विदेश नीति इस समय “strategic autonomy” पर आधारित है, जहां राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए वैश्विक संबंधों को संतुलित रखा जाता है। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम पर भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट और सावधानीपूर्ण माना जा रहा है।