RSSYouth – नई पीढ़ी से संवाद बढ़ाने की तैयारी में आरएसएस, देशभर के छात्रों से बातचीत करेंगे मोहन भागवत
RSSYouth– दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं, खासकर Gen-Z की भागीदारी ने राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का ध्यान नई पीढ़ी की ओर खींचा है। इसी बदलते माहौल के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने युवाओं से सीधे संवाद बढ़ाने की पहल की है। इस क्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत देश के 100 से अधिक शहरों के विद्यार्थियों से एक साथ संवाद करेंगे। कार्यक्रम में करीब 2,000 से अधिक छात्रों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

IIMUN के विशेष कार्यक्रम में होगा संवाद
यह संवाद ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइटेड नेशन्स’ (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित वार्षिक चैंपियनशिप कॉन्फ्रेंस के दौरान होगा। 6 अगस्त को मुंबई स्थित अंबानी सेंटर से आयोजित इस कार्यक्रम में मोहन भागवत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों से जुड़ेंगे। IIMUN एक युवा नेतृत्व मंच है, जिसकी गतिविधियां भारत सहित 40 से अधिक देशों तक फैली हुई हैं और इसमें बड़ी संख्या में छात्र सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
नई पीढ़ी के साथ संवाद पर संगठन का जोर
संघ का कहना है कि युवाओं से नियमित संवाद समय की आवश्यकता है। संगठन के अनुसार, वर्ष 2011 में शुरू हुए IIMUN का संचालन भी मुख्य रूप से युवाओं द्वारा किया जाता है और अब तक करोड़ों छात्र इससे जुड़ चुके हैं। हाल के सार्वजनिक कार्यक्रमों में मोहन भागवत भी यह बात दोहरा चुके हैं कि बदलते सामाजिक परिवेश को समझने के लिए नई पीढ़ी की बात सुनना और उनके विचारों को महत्व देना जरूरी है। उनका मानना है कि संवाद के माध्यम से कई जटिल सामाजिक चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है।
हाल की घटनाओं के बाद बढ़ी सक्रियता
दिल्ली में नीट यूजी परीक्षा से जुड़े मुद्दे को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद युवाओं की सक्रिय भागीदारी चर्चा का विषय बनी थी। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए युवाओं से संवाद बढ़ाने की पहल की थी। अब आरएसएस की ओर से भी छात्रों तक सीधे पहुंचने की इस योजना को उसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है, जहां युवा वर्ग की भागीदारी और उनकी राय को अधिक महत्व मिल रहा है।
बदलती पीढ़ी को समझने की कोशिश
मोहन भागवत पहले भी कई अवसरों पर कह चुके हैं कि समय के साथ समाज और सोच दोनों बदलते हैं, इसलिए नई पीढ़ी की अपेक्षाओं और दृष्टिकोण को समझना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा था कि अनुभव व्यक्ति को निरंतर सीखने का अवसर देते हैं और संवाद किसी भी स्वस्थ समाज की सबसे मजबूत कड़ी होता है। हाल के घटनाक्रमों के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि देश की युवा आबादी सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रख रही है। ऐसे में विभिन्न संगठन और राजनीतिक दल भी युवाओं से सीधा जुड़ाव मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।