DefenseAlert – सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा अभ्यास तेज, पाकिस्तान में बढ़ी चिंता…
DefenseAlert – देश में किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर सुरक्षा तंत्र को सक्रिय किया गया है। गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद पंजाब और जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट और एयर रेड मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य न केवल सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी परखना है, बल्कि आम नागरिकों को भी आपातकालीन हालात में सही व्यवहार के प्रति जागरूक करना है। इसी बीच, पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में सतर्कता और बढ़ा दी गई है।

पहलगाम हमले की बरसी पर कड़ी निगरानी
22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले को एक वर्ष पूरा होने पर पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया गया है। खासतौर पर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। यह हमला पिछले वर्ष सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना था, जिसे ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
रामबन और किश्तवाड़ में विशेष अभ्यास
रामबन जिले में CRPF की 84वीं बटालियन ने हाईवे के पास स्थित एक व्यस्त इलाके में मॉक ड्रिल की। यह स्थान पर्यटकों के रुकने के कारण संवेदनशील माना जाता है। अभ्यास के दौरान जवानों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और समन्वय कौशल को परखा गया। वहीं किश्तवाड़ में एयर रेड और ब्लैकआउट ड्रिल की तैयारी की गई है, जिसमें प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने पहले ही लोगों को सूचित कर दिया है ताकि किसी तरह की अफवाह या घबराहट न फैले।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
पिछले साल पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सीमा पार आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन में कई बड़े लॉन्चपैड्स को निशाना बनाया गया और आतंकियों को भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद दोनों देशों के बीच कुछ दिनों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा रणनीतियों को लेकर नई दिशा दी, जिसका असर अब भी देखने को मिल रहा है।
पंजाब में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल
सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब में भी 24 अप्रैल को रात के समय ब्लैकआउट और एयर रेड अभ्यास आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान सायरन बजाकर चेतावनी दी जाएगी और निर्धारित क्षेत्रों में पूरी तरह अंधेरा किया जाएगा। अभ्यास का उद्देश्य नागरिकों को यह सिखाना है कि ऐसी स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल अभ्यास है और लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
स्थानीय स्तर पर तैयारियां और भागीदारी
लुधियाना और फरीदकोट जैसे शहरों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। लुधियाना में बिजली कटौती के साथ विभिन्न एजेंसियां मिलकर आपातकालीन प्रतिक्रिया का अभ्यास करेंगी। वहीं फरीदकोट में स्कूल परिसर में ड्रिल आयोजित होगी। इन गतिविधियों में NDRF, पुलिस, फायर ब्रिगेड और सिविल डिफेंस की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
पाकिस्तान में बढ़ती आशंका
भारत की इन तैयारियों को लेकर पाकिस्तान में चिंता देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रियाओं में यह आशंका जताई जा रही है कि भारत किसी बड़े कदम की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के अभ्यास सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन पिछले घटनाक्रमों के कारण पड़ोसी देश इसे अलग नजरिए से देख रहा है।
रणनीतिक पैटर्न पर नजर
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पिछले साल बड़े सैन्य ऑपरेशन से पहले भी इसी तरह के अभ्यास किए गए थे। यही वजह है कि मौजूदा गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे नियमित सुरक्षा अभ्यास बताया गया है, लेकिन इसका संदेश स्पष्ट है कि देश किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है।