HighCourtCase – हाईवे जमीन अधिग्रहण पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
HighCourtCase – उत्तराखंड में प्रस्तावित चार-लेन हाईवे परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण पर उठे विवाद ने अब न्यायिक रूप ले लिया है। इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

याचिका में अधिसूचनाओं को दी चुनौती
यह मामला रामनगर और काशीपुर के बीच प्रस्तावित सड़क परियोजना से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं को चुनौती देते हुए कहा है कि जमीन के वर्गीकरण में गंभीर त्रुटियां हैं। उनके अनुसार, जिन भूखंडों को कृषि भूमि बताया गया है, वास्तव में वहां आवासीय और व्यावसायिक निर्माण मौजूद हैं।
मुआवजे को लेकर जताई आपत्ति
याचिका में यह भी कहा गया है कि जमीन के गलत वर्गीकरण के कारण प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। चूंकि भूमि को कृषि श्रेणी में रखा गया है, इसलिए मुआवजे की दर कम तय की गई है। इससे स्थानीय निवासियों को आर्थिक नुकसान होने की बात सामने आई है।
आजीविका पर असर की चिंता
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया से उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। कई लोगों के घर और व्यवसाय इस परियोजना की जद में आ रहे हैं, जिससे उनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी है।
कोर्ट ने मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत किया जाए, ताकि मामले की आगे सुनवाई की जा सके। फिलहाल कोर्ट ने किसी प्रकार का अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।
समानांतर परियोजनाओं पर भी काम जारी
इसी बीच, राज्य में अन्य सड़क परियोजनाओं पर काम जारी है। देहरादून क्षेत्र में एक बाईपास परियोजना का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिसका उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना और शहर में भीड़ कम करना है। यह परियोजना दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़ी हुई है।
परियोजना की प्रगति और महत्व
अधिकारियों के अनुसार, बाईपास निर्माण कार्य का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है और इसे निर्धारित समय में पूरा करने की दिशा में काम जारी है। इस परियोजना के पूरा होने से यातायात व्यवस्था में सुधार और यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद है।