WaqfDispute – वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण के बीच मस्जिदों पर उठे सवाल
WaqfDispute – उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दालमंडी क्षेत्र में चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के बीच कई मस्जिदों को लेकर नई स्थिति सामने आई है। इस मुद्दे पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने प्रदेश के विभिन्न इस्लामिक संस्थानों से धार्मिक राय यानी फतवा मांगा है। कमेटी का कहना है कि आगे की कार्रवाई इस राय और नए वक्फ कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखकर ही तय की जाएगी।

बैठक में लिया गया अहम निर्णय
सोमवार को जैतपुरा स्थित अबु हनीफा मस्जिद में आयोजित बैठक में इमाम, मुतवल्ली, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बुनकर समुदाय के लोग शामिल हुए। बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि दारुल उलूम देवबंद, बरेली, मुबारकपुर, मुरादाबाद और वाराणसी के अन्य मदरसों से इस विषय पर मार्गदर्शन लिया जाएगा। कमेटी से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि मामला संवेदनशील है, इसलिए धार्मिक और कानूनी दोनों पहलुओं को समझना जरूरी है।
प्रशासनिक प्रक्रिया और वक्फ बोर्ड की स्थिति
कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन के अनुसार, जिला प्रशासन ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पत्र भेजा था। हालांकि, बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जिसके चलते वह औपचारिक निर्णय देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में वक्फ अधिनियम के तहत उपलब्ध प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रशासन को जवाब भेज दिया गया है।
चौड़ीकरण परियोजना में मस्जिदें भी शामिल
लोक निर्माण विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, दालमंडी सड़क चौड़ीकरण योजना के दायरे में कुल आठ वक्फ संपत्तियां आ रही हैं, जिनमें छह मस्जिदें शामिल हैं। इनमें लंगड़ा हाफिज मस्जिद भी है, जिसे करीब दो सौ वर्ष पुराना बताया जाता है। यह मस्जिद अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के प्रबंधन में है और हाल ही में इसके कुछ हिस्से पर लाल निशान लगाया गया है।
जमीन को लेकर उठे सवाल
प्रशासन की जांच में सामने आया है कि मस्जिद का कुछ हिस्सा नजूल जमीन पर बना हुआ है। हालांकि मस्जिद प्रबंधन इस दावे से सहमत नहीं है। अब नगर निगम से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कराई जा रही है। राजस्व विभाग की टीम जल्द ही मौके पर जाकर स्थिति का भौतिक सत्यापन करेगी, जिससे जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
लंबे समय से जारी है कार्रवाई
दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण का काम कई महीनों से जारी है। इस परियोजना के तहत लगभग 650 मीटर लंबी सड़क को 17.4 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसके लिए करीब 221 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस दायरे में कुल 184 भवन आ रहे हैं, जिनमें से अब तक 48 से अधिक संपत्तियों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है।
ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया जारी
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिन भवनों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जा रहा है। पिछले कुछ समय में करीब 40 भवनों को हटाया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार आगे बढ़ रही है और सभी मामलों में दस्तावेजों की जांच के बाद ही कार्रवाई की जा रही है।
यह पूरा मामला अब प्रशासनिक, कानूनी और धार्मिक तीनों स्तरों पर विचार का विषय बन गया है। स्थानीय स्तर पर लोग भी इस पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि अंतिम निर्णय आने वाले समय में स्पष्ट होगा।