राष्ट्रीय

BorderFence – बंगाल के सीमा फैसले पर बांग्लादेश की आई प्रतिक्रिया

BorderFence – पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी से जुड़े फैसले के बाद दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की पहली बैठक में सीमा सुरक्षा बल को बाड़ लगाने के लिए आवश्यक जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दी गई। इस फैसले के बाद बांग्लादेश की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

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बांग्लादेश सरकार से जुड़े अधिकारियों ने कहा है कि उनका देश सीमा पर लगाए जाने वाले तारों या फेंसिंग से चिंतित नहीं है, लेकिन सीमा पर होने वाली हिंसक घटनाओं और नागरिकों की मौतों को लेकर वह अपनी बात मजबूती से उठाता रहेगा। इस बयान के बाद सीमा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर चर्चा और बढ़ गई है।

लंबे समय से उठता रहा है सीमा सुरक्षा का मुद्दा

भारत-बांग्लादेश सीमा के कई हिस्सों में अब तक पूरी तरह बाड़ नहीं लग पाई है। पश्चिम बंगाल में यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। हाल के विधानसभा चुनावों में भी सीमा सुरक्षा और घुसपैठ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी हाल में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सीमा से जुड़े जिलों में जमीन उपलब्ध कराकर फेंसिंग का काम तेज किया जाए। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।

बांग्लादेश ने क्या कहा

बांग्लादेश के विदेश मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी हुमायूं कबीर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका देश किसी भी परिस्थिति में अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से रखने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध बनाए रखने हैं तो सीमा प्रबंधन में मानवीय दृष्टिकोण भी जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश भारत की आंतरिक राजनीति पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन सीमा से जुड़े मुद्दों पर उसकी नजर बनी हुई है। उनके अनुसार, दोनों देशों के संबंध केवल राजनीतिक बयानबाजी पर नहीं बल्कि व्यावहारिक सहयोग पर आधारित होने चाहिए।

सीमा पर घटनाओं को लेकर चिंता

बांग्लादेश की ओर से सीमा पर होने वाली मौतों और सुरक्षा घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहती हैं तो उनका देश इस पर चुप नहीं रहेगा। हालांकि साथ ही यह भी कहा गया कि बांग्लादेश अपने पड़ोसी देशों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखने के पक्ष में है।

हाल के दिनों में बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वहां के गृह मंत्रालय ने बताया था कि चुनाव के बाद सीमा क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है ताकि किसी भी तरह की घुसपैठ या तनाव की स्थिति से निपटा जा सके।

बंगाल सरकार ने तेज की प्रक्रिया

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। राज्य सरकार ने मुख्य सचिव और भूमि विभाग के अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लगने वाली सीमा करीब 2216 किलोमीटर लंबी है। इसमें से लगभग 569 किलोमीटर क्षेत्र में अब भी बाड़ लगाने का काम अधूरा है। राज्य सरकार का कहना है कि अधिकांश जमीन पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है और बाकी प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।

सुरक्षा और कूटनीति दोनों पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा सुरक्षा से जुड़े फैसलों का असर केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव दोनों देशों के संबंधों पर भी पड़ता है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और बांग्लादेश के बीच बातचीत अहम मानी जा रही है।

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