MentalHealth – भावनात्मक दूरी और तनाव भी बढ़ा सकते हैं वजन, विशेषज्ञों ने बताए कारण
MentalHealth – अक्सर लोग बढ़ते वजन के पीछे केवल ज्यादा खाना, जंक फूड या कम शारीरिक गतिविधि को जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में मानसिक और भावनात्मक स्थिति भी शरीर के वजन को प्रभावित कर सकती है। लगातार तनाव, अकेलापन या रिश्तों में भावनात्मक दूरी शरीर के हार्मोन और दिनचर्या पर असर डालती है, जिसका परिणाम धीरे-धीरे वजन बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है।

तनाव और हार्मोन का संबंध
विशेषज्ञों के मुताबिक जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक मानसिक दबाव में रहता है, तो शरीर में cortisol hormone का स्तर बढ़ने लगता है। यह हार्मोन तनाव की स्थिति में सक्रिय होता है और शरीर की कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। इसके बढ़ने से भूख अधिक लग सकती है और मीठा या ज्यादा कैलोरी वाला खाना खाने की इच्छा बढ़ जाती है। कई लोगों में पेट के आसपास चर्बी जमा होने की समस्या भी इसी वजह से देखी जाती है।
डॉक्टरों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को पर्याप्त भावनात्मक सहयोग नहीं मिलता या वह लगातार तनाव महसूस करता है, तो शरीर धीरे-धीरे उस दबाव को फिजिकल बदलावों के जरिए दिखाने लगता है। यही कारण है कि मानसिक स्वास्थ्य को अब फिटनेस का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
नींद की कमी का भी पड़ता है असर
तनाव और भावनात्मक असंतुलन का असर केवल मूड तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। कई लोग चिंता या मानसिक दबाव के कारण पूरी नींद नहीं ले पाते। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार कम नींद लेने से metabolism धीमा पड़ सकता है।
नींद पूरी न होने पर शरीर थका हुआ महसूस करता है, जिससे रोजमर्रा की गतिविधियों में सक्रियता कम हो सकती है। ऐसे में वॉक, एक्सरसाइज या अन्य फिजिकल एक्टिविटी से दूरी बढ़ने लगती है। इसके साथ ही बार-बार कुछ खाने की इच्छा भी बढ़ सकती है, जो वजन बढ़ने का कारण बनती है।
भावनात्मक दूरी बदल सकती है लाइफस्टाइल
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जब व्यक्ति खुद को emotionally disconnected महसूस करता है, तो उसका असर उसकी आदतों और दिनचर्या पर साफ दिखाई देने लगता है। कई बार लोग सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाने लगते हैं और धीरे-धीरे passive lifestyle अपनाने लगते हैं।
ऐसी स्थिति में motivation कम हो सकता है और शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होने लगती है। इसका असर फिटनेस रूटीन पर पड़ता है और लोग नियमित व्यायाम या शारीरिक गतिविधियों में रुचि खोने लगते हैं। लंबे समय तक ऐसा बने रहने पर वजन बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है।
भावनात्मक संतुलन क्यों है जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर emotional connection और मानसिक संतुलन शरीर को कई स्तरों पर फायदा पहुंचा सकता है। इससे तनाव कम होता है, mood बेहतर रहता है और नींद की गुणवत्ता में भी सुधार देखा जाता है। कुछ विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि मानसिक रूप से संतुलित रहने पर hormones के काम करने की प्रक्रिया सामान्य बनी रहती है।
डॉक्टरों के अनुसार फिट रहने के लिए केवल कैलोरी गिनना या घंटों जिम करना ही काफी नहीं है। मानसिक शांति, पर्याप्त आराम और मजबूत भावनात्मक सहयोग भी स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यदि कोई व्यक्ति लगातार तनाव, अकेलापन या भावनात्मक दबाव महसूस कर रहा है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।