Kolkata – पार्क सर्कस हिंसा के बाद बंगाल सरकार ने दिखाया सख्त रुख
Kolkata – कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन और हिंसक झड़प के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और नई प्रशासनिक गाइडलाइंस के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई, जिसमें कई सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।

पुलिस के अनुसार, हिंसा और सरकारी वाहनों पर हमले के आरोप में अब तक 40 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि उपद्रव के दौरान पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों पर पथराव किया गया, जिससे कम से कम 10 जवान घायल हुए। सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रभावित इलाके का दौरा कर हालात की समीक्षा की और सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत की।
प्रदर्शन के दौरान बिगड़े हालात
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और धार्मिक गतिविधियों को लेकर कुछ नई गाइडलाइंस जारी की थीं। इसके साथ ही कोलकाता में अतिक्रमण हटाने का अभियान भी चलाया जा रहा है। इन्हीं मुद्दों के विरोध में पार्क सर्कस सेवन पॉइंट क्रॉसिंग के पास लोगों की भीड़ जमा हुई थी।
शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया गया, लेकिन बाद में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने जब सड़क खाली कराने और यातायात बहाल करने की कोशिश की, तब कुछ प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव शुरू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान कई वाहनों को नुकसान पहुंचा और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा
घटना के बाद पार्क सर्कस और आसपास के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सोमवार को भी सीआरपीएफ और राज्य पुलिस ने कई हिस्सों में फ्लैग मार्च किया। प्रमुख चौराहों और बाजार क्षेत्रों में बैरिकेडिंग कर निगरानी बढ़ा दी गई है।
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए लगातार गश्त की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने दी सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घायल सुरक्षाकर्मियों से मुलाकात के बाद कहा कि कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक नारों की आड़ में हिंसा और पत्थरबाजी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना सभी का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार के संपर्क में है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुरोध किया है कि चुनावों के दौरान तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की कुछ कंपनियों को अभी राज्य में बनाए रखा जाए।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
घटना के बाद राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। बीजेपी नेताओं ने हिंसा को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं, जबकि टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि बंगाल की राजनीति हमेशा सामाजिक सौहार्द और संवाद की परंपरा से जुड़ी रही है और किसी भी तरह की सख्ती को समाधान नहीं माना जा सकता।