ArtsUniversity – बिहार में राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय खोलने की तैयारी तेज
ArtsUniversity – बिहार में कला और सांस्कृतिक शिक्षा को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार अब एक राष्ट्रीय स्तर का कला विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही भोजपुरी लोकनाट्य परंपरा के महान कलाकार भिखारी ठाकुर की स्मृतियों को सहेजने के लिए उनके नाम पर संग्रहालय बनाने की पहल भी की जा रही है। कला, संस्कृति और युवा विभाग ने इन दोनों परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रारंभिक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है।

अगर यह योजना आकार लेती है, तो बिहार उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां समर्पित कला विश्वविद्यालय पहले से संचालित हैं। फिलहाल दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में इस तरह के संस्थान मौजूद हैं।
कला शिक्षा के लिए नया संस्थान बनाने की तैयारी
बिहार में फाइन आर्ट्स की पढ़ाई अभी सीमित स्तर तक ही उपलब्ध है। पटना आर्ट कॉलेज में दृश्य कला की शिक्षा दी जाती है, लेकिन रंगमंच, संगीत और नृत्य जैसी मंचीय कलाओं के लिए राज्य में कोई समर्पित विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षण संस्थान नहीं है। यही कारण है कि वर्षों से कलाकारों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार, कला संस्कृति विभाग ने राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित करने को लेकर सिद्धांत रूप से सहमति बना ली है। अब विभाग विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार के उच्च स्तर पर मंजूरी के लिए भेजने की प्रक्रिया में जुटा है।
राष्ट्रीय स्तर की होगी शिक्षा व्यवस्था
कला संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने बताया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय में संगीत, नृत्य, रंगमंच और उनसे जुड़ी विभिन्न विधाओं की व्यवस्थित पढ़ाई कराई जाएगी। यहां विशेषज्ञ शिक्षकों और अनुभवी कलाकारों की नियुक्ति की जाएगी ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक और अकादमिक दोनों स्तरों पर प्रशिक्षण मिल सके।
उन्होंने कहा कि यह संस्थान केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर के विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। सरकार का मानना है कि बिहार में कला प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन उचित मंच और संस्थागत समर्थन के अभाव में कई कलाकार आगे नहीं बढ़ पाते।
भिखारी ठाकुर संग्रहालय की भी तैयारी
राज्य सरकार भोजपुरी लोक संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में भोजपुरी रंगमंच और लोककला के महान हस्ताक्षर भिखारी ठाकुर के नाम पर संग्रहालय बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
भिखारी ठाकुर को भोजपुरी का शेक्सपीयर कहा जाता है। उनकी रचनाओं और लोकनाट्य शैली ने बिहार और पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी थी। प्रस्तावित संग्रहालय में उनके जीवन, साहित्य और रंगमंचीय योगदान से जुड़ी सामग्री को संरक्षित किया जाएगा।
रास्ते में कई चुनौतियां भी
हालांकि इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करना आसान नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि कला विश्वविद्यालय के लिए अनुभवी शिक्षकों, प्रशिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की जरूरत होगी। कला शिक्षा के क्षेत्र में योग्य मानव संसाधन जुटाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है।
इसके अलावा बुनियादी ढांचे, पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय स्तर की मान्यता से जुड़े कई पहलुओं पर भी गंभीर तैयारी करनी होगी। फिर भी सरकार का मानना है कि लंबे समय में यह संस्थान बिहार के सांस्कृतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
कलाकारों को मिलेगा बड़ा मंच
सरकार का दावा है कि विश्वविद्यालय बनने से राज्य के कलाकारों का दूसरे प्रदेशों की ओर पलायन कम होगा। फिलहाल संगीत और नृत्य की पढ़ाई के लिए हर साल बड़ी संख्या में छात्र यूपी, हरियाणा और अन्य राज्यों के संस्थानों में दाखिला लेते हैं।
रंगमंच से जुड़े कलाकार भी लंबे समय से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तर्ज पर बिहार में संस्थान खोलने की मांग करते रहे हैं। नए विश्वविद्यालय के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को अपने राज्य में ही प्रशिक्षण और अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।