Diplomacy – निज्जर मामले पर भारत-कनाडा के बीच फिर बढ़ा तनाव
Diplomacy – भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया है जिनमें भारत सरकार को खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़ने की कोशिश की गई थी। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले को राजनीतिक रंग देकर पेश किया जा रहा है और अब तक कोई ठोस सार्वजनिक सबूत सामने नहीं आया है।

कनाडाई एजेंसियों को लेकर जताई चिंता
कनाडा के अखबार ‘द ग्लोब एंड मेल’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारतीय उच्चायुक्त ने कनाडाई सुरक्षा एजेंसी CSIS के कुछ हिस्सों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी अलगाववादी समूह वहां के सुरक्षा माहौल को प्रभावित कर रहे हैं। उनका मानना है कि इन समूहों ने कनाडा की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में ऐसी धारणा मजबूत हुई है कि कनाडा का सुरक्षा ढांचा कुछ मामलों में निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहा है। हालांकि, बाद में पटनायक ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि उनकी बातचीत को संदर्भ से अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया।
‘पब्लिक ट्रायल’ पर भारत की आपत्ति
उच्चायुक्त ने इस पूरे मामले में मीडिया ट्रायल और राजनीतिक बयानबाजी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर आरोप को अदालत में साबित किया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक मंचों पर बहस के जरिए। उनका कहना था कि कनाडा सरकार ने अभी तक ऐसा कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है जिससे भारत सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका साबित हो सके।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी घटना में कुछ स्वतंत्र तत्व शामिल रहे हों तो उसकी जांच कानून के तहत होनी चाहिए, लेकिन पूरे देश या सरकार को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। भारतीय पक्ष लगातार यही कहता रहा है कि बिना प्रमाण के लगाए गए आरोप द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
भारतीय राजनयिकों की नियुक्ति पर भी उठा विवाद
कनाडा में तैनात कुछ भारतीय अधिकारियों की पृष्ठभूमि को लेकर भी विवाद सामने आया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पटनायक ने कहा कि आतंकवाद-निरोध का अनुभव रखने वाले अधिकारियों की नियुक्ति पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई अधिकारी आतंकवाद से निपटने का विशेषज्ञ है तो उससे डरने की वजह क्या हो सकती है।
उन्होंने कनाडा की संघीय पुलिस RCMP की कार्यप्रणाली की सराहना भी की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि किसी भी सुरक्षा एजेंसी को राजनीतिक दबाव से दूर रहकर काम करना चाहिए। भारतीय पक्ष का मानना है कि सुरक्षा और कूटनीति से जुड़े मामलों को राजनीतिक विवाद में बदलना दोनों देशों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
बयान के बाद भारत की आधिकारिक सफाई
रिपोर्ट सामने आने के बाद भारतीय उच्चायोग ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि भारत और कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों के बीच पिछले एक साल में अच्छा सहयोग बना रहा है। बयान में कहा गया कि दोनों देशों के बीच नियमित संवाद और सुरक्षा बैठकों से यह स्पष्ट होता है कि संस्थागत स्तर पर संपर्क जारी है।
उच्चायोग ने यह भी कहा कि ऑफ-द-रिकॉर्ड बातचीत को चुनिंदा हिस्सों में पेश कर गलत संदेश देने की कोशिश की गई। भारत ने दोहराया कि उसे कनाडा की संस्थाओं पर भरोसा है और किसी भी भ्रामक व्याख्या को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कनाडा सरकार ने दावों को बताया गलत
कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसंगारी ने भारतीय पक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि CSIS जैसी एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कनाडाई सुरक्षा अधिकारी पेशेवर तरीके से काम कर रहे हैं और उन पर लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
गौरतलब है कि 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तेज गिरावट आई थी। इसके बाद राजनयिक निष्कासन, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ते गए। फिलहाल इस मामले में चार भारतीय नागरिकों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए गए हैं, जबकि अदालत में सुनवाई आने वाले वर्षों में शुरू होने की संभावना है।
आर्थिक रिश्तों को बचाने की कोशिश
राजनयिक विवादों के बावजूद दोनों देश आर्थिक संबंधों को पूरी तरह टूटने नहीं देना चाहते। हाल के महीनों में व्यापार वार्ताएं दोबारा शुरू हुई हैं और मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक और आर्थिक हित दोनों देशों को संवाद बनाए रखने के लिए मजबूर करेंगे, भले ही राजनीतिक मतभेद फिलहाल कायम रहें।