उत्तराखण्ड

Weather Update – उत्तराखंड में कम बारिश से खेती पर बढ़ी चिंता, मानसून का इंतजार…

Weather Update – उत्तराखंड में जून के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज होने के कारण किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की कमी बनी हुई है, जिसका सीधा असर खेती और बागवानी पर दिखाई देने लगा है। विभाग ने अनुमान जताया है कि प्रदेश में मानसून 29 या 30 जून तक प्रवेश कर सकता है। फिलहाल देहरादून, टिहरी समेत आठ जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।

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बारिश की कमी से खेती प्रभावित

प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में गर्मी और उमस लगातार बढ़ रही है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे कृषि प्रधान जिलों में धान और गन्ने की फसल पर दबाव बढ़ता जा रहा है। किसानों को आशंका है कि यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है। कई स्थानों पर सिंचाई के लिए अतिरिक्त संसाधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे लागत भी बढ़ रही है।

कई जिलों में फलों और सब्जियों पर असर

देहरादून जिले के जौनसार-बावर और त्यूणी क्षेत्र में बारिश की कमी के कारण मक्का की बुवाई समय पर नहीं हो सकी है। हरा धनिया, टमाटर और उच्च घनत्व वाले सेब बागानों में भी प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था के बावजूद फसलों की बढ़वार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है।

नैनीताल जिले में भी सेब, पुलम, खुमानी, आड़ू और नाशपाती जैसी फल फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अल्मोड़ा में पहले हुई ओलावृष्टि ने फल उत्पादकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जबकि कुछ इलाकों में खेती की गतिविधियां सामान्य बनी हुई हैं।

आठ जिलों में वर्षा की संभावना

मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल, देहरादून, टिहरी और पिथौरागढ़ के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में गरज के साथ वर्षा होने की भी संभावना जताई गई है। अन्य जिलों में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है।

विभाग का कहना है कि 28 जून तक मौसम का यही रुख बना रह सकता है। 26 से 28 जून के बीच पर्वतीय जिलों में बारिश की गतिविधियों में कुछ बढ़ोतरी होने के संकेत हैं।

हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में सबसे अधिक कमी

आंकड़ों के अनुसार राज्य के 13 जिलों में से केवल टिहरी में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। बाकी 12 जिलों में बारिश सामान्य स्तर से नीचे रही। सबसे ज्यादा कमी हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में दर्ज की गई, जहां क्रमशः 74 और 72 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसका असर तापमान पर भी पड़ा है और कई क्षेत्रों में पारा सामान्य से लगभग तीन डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया है।

मानसून पर टिकी किसानों की उम्मीद

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान और गन्ना जैसी फसलें इस समय पर्याप्त पानी पर निर्भर हैं। यदि जून के अंतिम दिनों तक अच्छी बारिश नहीं होती है तो खरीफ सीजन की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि धान की रोपाई पर्याप्त वर्षा होने के बाद ही करें ताकि फसल को शुरुआती चरण में पर्याप्त नमी मिल सके।

मई में बेहतर रही थी वर्षा की स्थिति

मई महीने में राज्य में सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई थी। उस दौरान औसत वर्षा 62.6 मिमी के मुकाबले 84.1 मिमी दर्ज हुई थी। हालांकि जून में अब तक केवल 74.9 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य स्तर 115.6 मिमी माना जाता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के चलते इस बार जून में अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी।

पहाड़ी जिलों में स्थिति मिश्रित

बागेश्वर, चमोली और चंपावत जैसे जिलों में समय पर हुई बारिश से किसानों को राहत मिली है और यहां धान, मड़ुवा तथा अन्य फसलों की बुवाई सामान्य गति से जारी है। कृषि विभाग ने इन क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन की संभावना जताई है। दूसरी ओर कुछ पर्वतीय क्षेत्रों में फल उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई है, जहां मौसम की अनिश्चितता का असर दिखाई दे रहा है।

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