Justice Verdict – लाहौर मोटरवे गैंगरेप मामले में फांसी की सजा बरकरार, फैसले पर आई अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
Justice Verdict – पाकिस्तान के चर्चित लाहौर मोटरवे गैंगरेप मामले में लाहौर हाईकोर्ट ने दो दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी है। अदालत ने 3 जून 2026 को सुनाए गए अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत द्वारा दिए गए आदेश में हस्तक्षेप की कोई ठोस वजह नहीं है। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है, जिस पर दुनिया के प्रमुख उद्योगपति एलन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी है।

2020 की घटना ने देश को झकझोर दिया था
यह मामला सितंबर 2020 में सामने आया था, जब पाकिस्तानी मूल की एक फ्रांसीसी महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर यात्रा कर रही थी। देर रात उनकी गाड़ी में ईंधन खत्म हो गया, जिसके कारण परिवार सड़क किनारे रुकने को मजबूर हो गया। इसी दौरान कुछ लोगों ने महिला और उसके परिवार को निशाना बनाया।
आरोपियों ने कथित तौर पर वाहन को नुकसान पहुंचाकर महिला को जबरन बाहर निकाला और बच्चों के सामने गंभीर अपराध को अंजाम दिया। घटना के बाद परिवार से नकदी, आभूषण और अन्य सामान भी छीन लिया गया। इस मामले ने पूरे पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी।
जांच में वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों की अहम भूमिका
घटना के बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर जांच अभियान शुरू किया। जांच एजेंसियों ने मोबाइल फोन रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा के आधार पर संदिग्धों तक पहुंच बनाई। इसके साथ ही घटनास्थल से जुटाए गए डीएनए नमूनों ने भी आरोपियों की पहचान की पुष्टि की।
कानूनी प्रक्रिया के दौरान पीड़िता ने भी दोनों आरोपियों की पहचान की थी। जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, आरोपियों में से एक ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपराध स्वीकार करने का बयान भी दिया था।
2021 में सुनाई गई थी मौत की सजा
मार्च 2021 में आतंकवाद निरोधी अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को गैंगरेप, अपहरण, डकैती और आतंकवाद से संबंधित आरोपों में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें फांसी की सजा के अलावा उम्रकैद और अन्य कारावास की सजाएं भी सुनाई थीं।
इसके बाद दोषियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सजा को चुनौती दी। उनका दावा था कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में कमियां हैं और मामले में संदेह की गुंजाइश मौजूद है।
हाईकोर्ट ने अपील खारिज की
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों के खिलाफ वैज्ञानिक और तकनीकी दोनों प्रकार के मजबूत साक्ष्य मौजूद हैं। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद ही फैसला सुनाया था।
लाहौर हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोषियों की अपील को खारिज कर दिया और फांसी की सजा को यथावत रखने का आदेश दिया। अदालत के इस निर्णय को पाकिस्तान में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
फैसले पर एलन मस्क और ब्रिटिश सांसद की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लोव ने सोशल मीडिया पर इसे साझा करते हुए सकारात्मक टिप्पणी की। उनके पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने पाकिस्तान की सराहना की।
मस्क ने अपने संदेश में कहा कि हिंसक अपराधों के मामलों में पश्चिमी देशों को भी कठोर सजा के प्रावधानों पर विचार करना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गई है।