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RailFreight – एकल लाइसेंस नीति से लॉजिस्टिक्स शेयरों में बढ़ा निवेशकों का भरोसा

RailFreight – केंद्र सरकार ने रेल माल ढुलाई क्षेत्र में बड़ा नीतिगत बदलाव किया है, जिसका असर शेयर बाजार में भी साफ दिखाई दिया। नई व्यवस्था के तहत अब Container Train Operators (CTOs) को देशभर में कंटेनर ट्रेनें चलाने के लिए अलग-अलग रेल मार्गों का लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर परिचालन के लिए एक ही All India License पर्याप्त होगा। सरकार का मानना है कि इससे कारोबार करना आसान होगा और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

rail freight single license policy

मॉडल एग्रीमेंट में किया गया महत्वपूर्ण बदलाव

रेल मंत्रालय ने Model Concession Agreement (MCA) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। पहले कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को विभिन्न रूटों के लिए अलग-अलग लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी। सरकार जल्द ही इस बदलाव को Gazette Notification के जरिए प्रभावी करने की तैयारी में है।

शेयर बाजार में दिखा सकारात्मक असर

सरकारी फैसले के बाद निवेशकों ने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की कंपनियों में रुचि दिखाई। गुरुवार के कारोबार के दौरान Allcargo Logistics के शेयरों में करीब 13 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर लगभग 15.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ 9.42 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, इसी क्षेत्र की अन्य कंपनियां Gateway Distriparks और Container Corporation of India (CONCOR) के शेयरों में अपेक्षाकृत सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

नई कंपनियों के लिए तय हुआ शुल्क

नई नीति के अनुसार, जो भी कंपनी Container Train Operator के रूप में काम शुरू करना चाहती है, उसे पूरे रेलवे नेटवर्क के लिए 25 करोड़ रुपये का एकमुश्त और Non-Refundable Registration Fee जमा करना होगा। इसके बाद कंपनी देश के किसी भी रेलवे मार्ग पर कंटेनर ट्रेन संचालित कर सकेगी। सरकार का कहना है कि इससे लाइसेंसिंग प्रक्रिया सरल होगी और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी।

लंबी अवधि के निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन

सरकार ने मौजूदा ऑपरेटरों को भी एक अहम राहत दी है। नई व्यवस्था के तहत कंपनियां अपने Concession Period को अतिरिक्त 20 वर्षों तक बढ़ा सकेंगी और इसके लिए उन्हें किसी प्रकार का अतिरिक्त Renewal या Extension Fee नहीं देना होगा। माना जा रहा है कि इससे रेलवे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और कंपनियां नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक भरोसे के साथ निवेश कर सकेंगी।

माल ढुलाई और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि एकल लाइसेंस व्यवस्था से परिचालन लागत कम हो सकती है और कंटेनर ट्रेनों के संचालन में लचीलापन बढ़ेगा। इससे माल की ढुलाई तेज होने, रेलवे नेटवर्क का बेहतर उपयोग होने और उद्योगों तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, लॉजिस्टिक्स सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार की संभावना जताई जा रही है।

निवेशकों की नजर अगले चरण पर

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि नीति में बदलाव का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में कंपनियों के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन में दिखाई देगा। फिलहाल Allcargo Logistics के शेयरों में आई तेजी यह संकेत देती है कि निवेशकों ने इस फैसले का सकारात्मक स्वागत किया है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि नई लाइसेंस व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ किन कंपनियों को मिलता है और इससे रेलवे आधारित माल ढुलाई क्षेत्र में कितना विस्तार होता है।

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