Fraud Case – युवक के नाम पर 10 करोड़ का ऋण, प्रशासन ने शुरू की जांच
Fraud Case – उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में पहचान के कथित दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बरहज क्षेत्र के एक युवक को तब हैरानी हुई जब उसे पता चला कि उसके नाम पर न केवल एक कंपनी संचालित हो रही है, बल्कि उससे जुड़ा करोड़ों रुपये का ऋण भी दर्ज है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित युवक ने जिला प्रशासन और पुलिस से शिकायत कर जांच की मांग की है। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

राजस्व विभाग की प्रक्रिया से खुला मामला
बरहज थाना क्षेत्र के बड़का गांव निवासी देवेश मिश्र को इस पूरे मामले की जानकारी तब मिली जब उनकी चल-अचल संपत्ति से संबंधित विवरण विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा मांगा गया। राजस्व विभाग के स्तर पर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया के दौरान मामला सामने आया और इसकी सूचना संबंधित व्यक्ति तक पहुंची।
जानकारी मिलते ही देवेश मिश्र ने प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया और अपने नाम के दुरुपयोग की आशंका जताई। इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन के साथ-साथ पुलिस को भी लिखित शिकायत दी।
प्रशासन के निर्देश पर दर्ज हुआ मामला
प्रारंभिक जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने संबंधित बैंक खातों और उपलब्ध दस्तावेजों की भी जांच की, लेकिन शुरुआती स्तर पर शिकायतकर्ता के खाते में किसी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के प्रमाण नहीं मिले।
जांच अधिकारी करुणेश राय के अनुसार, पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित ऋण किस प्रक्रिया के तहत लिया गया और इसमें किन लोगों की भूमिका हो सकती है। मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच की जा रही है।
कंपनी और जीएसटी पंजीकरण की जानकारी मिली
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि डी.एम इंटरप्राइजेज नाम से एक व्यावसायिक इकाई कथित तौर पर देवेश मिश्र के नाम से पंजीकृत है। इसके साथ ही संबंधित जीएसटी पंजीकरण भी उसी नाम पर दर्ज बताया गया। दस्तावेजों में लगभग 10 करोड़ रुपये के ऋण का भी उल्लेख मिला है।
पीड़ित का कहना है कि उसे इस कंपनी, जीएसटी पंजीकरण या ऋण के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभागों ने रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
रिकॉर्ड में कई जानकारियां नहीं मिलीं
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि जीएसटी पंजीकरण से जुड़े मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और बैंक खाते की जानकारी शिकायतकर्ता के विवरण से मेल नहीं खाती। हालांकि, आधार कार्ड का सत्यापन रिकॉर्ड में दर्ज पाया गया है।
अधिकारी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि पहचान संबंधी दस्तावेजों का उपयोग किस प्रकार किया गया और क्या इसमें किसी प्रकार की धोखाधड़ी या जालसाजी शामिल है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
महराजगंज में विदेश भेजने के नाम पर ठगी का मामला
इसी बीच महराजगंज जिले में भी आर्थिक धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। यहां कुछ युवकों ने आरोप लगाया है कि विदेश में नौकरी और वीजा दिलाने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये लिए गए, लेकिन न तो विदेश भेजा गया और न ही धनराशि वापस की गई।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, एक ट्रैवल कारोबार से जुड़े व्यक्ति ने स्वयं को सरकारी कर्मचारी बताते हुए भरोसा जीता और न्यूजीलैंड भेजने का दावा किया। इसके बाद पांच लोगों से अलग-अलग माध्यमों से धनराशि जमा कराई गई।
पांच लोगों से लाखों रुपये लेने का आरोप
पीड़ितों का कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति से लगभग 1.58 लाख रुपये लिए गए, जिससे कुल राशि करीब 7.90 लाख रुपये हो गई। आरोप है कि रकम प्राप्त करने के बाद वीजा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। बाद में संबंधित व्यक्ति का कार्यालय भी बंद मिला।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।