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NIA – पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट में साजिश से जुड़े नए खुलासे

NIA – जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इस हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनी संचालक सहित कुल 26 लोगों की मौत हुई थी। अब एजेंसी की चार्जशीट में सामने आए तथ्यों से संकेत मिलता है कि हमले की योजना घटना से कई दिन पहले तैयार की गई थी और इसमें आधुनिक डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया गया।

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मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के फोन बने अहम सबूत

जांच एजेंसी के अनुसार, जुलाई 2025 में श्रीनगर के दाचीगाम क्षेत्र में सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान तीन संदिग्ध आतंकी मारे गए थे। उनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिबरान और हमजा अफगानी के रूप में की गई। कार्रवाई के बाद उनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद हुए, जिनकी फोरेंसिक जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले। इनमें तस्वीरें, संदेशों के स्क्रीनशॉट और लोकेशन संबंधी जानकारी शामिल बताई गई है।

ट्रैकिंग ऐप के जरिए भेजी गई लोकेशन

चार्जशीट के अनुसार, मोबाइल फोन से प्राप्त डेटा में 15 और 16 अप्रैल 2025 के कुछ मैप स्क्रीनशॉट मिले हैं, जिनमें बैसरन घाटी के आसपास के इलाके चिह्नित दिखाई देते हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने ट्रैकिंग और पर्वतीय मार्गों के लिए इस्तेमाल होने वाले जीपीएस आधारित मोबाइल ऐप का उपयोग किया था। एजेंसी का दावा है कि इसी माध्यम से उन्हें आवश्यक लोकेशन और मार्ग संबंधी निर्देश प्राप्त हो रहे थे। इसके अलावा स्थानीय संपर्कों से संवाद के लिए कथित रूप से सुरक्षित संचार माध्यमों का इस्तेमाल भी किया गया।

जांच में पाकिस्तान से जुड़े संपर्कों का उल्लेख

चार्जशीट में कहा गया है कि जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी संगठन टीआरएफ से जुड़े एक कथित संचालक की भूमिका सामने आई है। एजेंसी का आरोप है कि पाकिस्तान से संचालित नेटवर्क के माध्यम से हमले की योजना, मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक निर्देश दिए जा रहे थे। जांच में यह भी दावा किया गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोकेशन साझा करने और गतिविधियों के समन्वय का काम किया गया।

स्थानीय सहयोग के आरोपों की भी जांच

एनआईए की रिपोर्ट में कुछ स्थानीय लोगों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी के अनुसार, हमले से पहले आतंकियों को पहाड़ी क्षेत्र में ठहरने और भोजन उपलब्ध कराने के आरोप में कुछ व्यक्तियों के खिलाफ जांच की गई है। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान मिले बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इन पहलुओं की पड़ताल की गई।

एक संरक्षित गवाह के बयान का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि उसने पहले आतंकियों को जंगल क्षेत्र में देखा था। गवाह के अनुसार, उस दौरान हथियार और अन्य सामग्री ड्रोन के जरिए पहुंचाने की चर्चा हुई थी। एजेंसी ने इन दावों को भी जांच का हिस्सा बनाया है।

बैसरन घाटी को चुनने के पीछे जांच एजेंसी का आकलन

चार्जशीट के अनुसार, बैसरन घाटी का भौगोलिक स्वरूप दुर्गम होने और उस क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था सीमित होने के कारण आतंकियों ने इसे निशाना बनाया। जांच एजेंसी का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों ने हमलावरों के लिए योजना को अंजाम देना अपेक्षाकृत आसान बनाया।

एनआईए ने इस मामले में व्यापक जांच करते हुए बड़ी संख्या में लोगों के बयान दर्ज किए हैं और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया है। एजेंसी ने संबंधित अदालत में अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है। मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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