बिहार

TenderScam – एसवीयू बोली, कई अधिकारियों पर अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिले…

TenderScam – बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले की जांच कर रही विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने कहा है कि अब तक की जांच में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने योग्य पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। एसवीयू के अनुसार, आईएएस अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर सहित अन्य अधिकारियों के संबंध में उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा की गई है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से लगाए गए निजी लाभ लेने के आरोपों के आधार पर राज्य सरकार अलग से विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

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प्रेस वार्ता में जांच की स्थिति स्पष्ट की

एसवीयू के एडीजी पंकज कुमार दराद ने प्रेस वार्ता में बताया कि ईडी की जांच के दौरान कई लोगों के बयान दर्ज किए गए थे। इन्हीं बयानों में कुछ अधिकारियों के नाम सामने आए, जिसके बाद एसवीयू ने उनसे पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए। अधिकारियों के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके आवासों पर भी तलाशी ली गई, लेकिन अब तक ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली जिससे आपराधिक अभियोजन के लिए पर्याप्त आधार बन सके।

विभागीय कार्रवाई पर सरकार करेगी निर्णय

एसवीयू का कहना है कि ईडी की रिपोर्ट में जिन अधिकारियों पर निजी लाभ लेने के आरोप लगाए गए हैं, उन आरोपों के आधार पर विभागीय कार्रवाई का निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाने की स्थिति नहीं बनती है। हालांकि विभागीय जांच और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं नियमानुसार जारी रहेंगी।

चार्जशीट में शामिल किए गए अन्य आरोपी

अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में पहले दर्ज प्राथमिकी में रिशुश्री, संजीव हंस, पवन कुमार और संतोष कुमार समेत अन्य अज्ञात सरकारी कर्मियों को आरोपी बनाया गया था। बाद की जांच में मुमुक्षु कुमार चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह को भी आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया है। एजेंसी के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

फरार आरोपियों की तलाश जारी

एसवीयू ने बताया कि मामले के दो आरोपी, संजीव हंस और पवन कुमार, अभी फरार हैं। जांच एजेंसी ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया जारी है और उन्हें जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।

कार्रवाई में देरी की वजह भी बताई

एडीजी पंकज कुमार दराद ने बताया कि कार्रवाई में हुई देरी का एक कारण ईडी की रिपोर्ट सीधे जांच एजेंसी के पास पहुंचना रहा। उनके अनुसार रिपोर्ट पहले राज्य सरकार के संज्ञान में लाई गई, जिसके बाद आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान मामले से जुड़े एक आरोपी ने उच्च न्यायालय का रुख किया, जिससे जांच की समय-सीमा भी प्रभावित हुई।

रोक हटने के बाद हुई गिरफ्तारी

एसवीयू के अनुसार, अदालत से गिरफ्तारी पर लगी रोक हटने के बाद एजेंसी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रिशुश्री को गिरफ्तार किया। इसके बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया गया। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और नए साक्ष्य मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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