उत्तराखण्ड

Ayushman – डिजिटल हेल्थ सिस्टम लागू नहीं करने वाले अस्पतालों पर होगी कार्रवाई

Ayushman – आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए अब डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली अपनाना अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सभी संबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 31 अगस्त तक निर्धारित डिजिटल व्यवस्थाएं लागू करना आवश्यक होगा। समयसीमा के बाद नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ योजना के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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31 अगस्त तक पूरी करनी होगी व्यवस्था

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रीना जोशी की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी सूचीबद्ध अस्पतालों में हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) लागू किया जाए। इसके माध्यम से मरीजों का पूरा उपचार संबंधी रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखा जाएगा। यह व्यवस्था तय समय सीमा के भीतर पूरी करना सभी अस्पतालों के लिए अनिवार्य होगा।

एक सितंबर से लागू होंगे नए नियम

आदेश के अनुसार 1 सितंबर से केवल वही अस्पताल आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत सेवाएं जारी रख सकेंगे, जिन्होंने सभी निर्धारित डिजिटल मानकों का पालन कर लिया होगा। जिन अस्पतालों में यह व्यवस्था लागू नहीं मिलेगी, उन्हें योजना के तहत उपचार और प्रोत्साहन राशि का लाभ नहीं दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

लाखों लाभार्थियों को मिलेगा फायदा

उत्तराखंड में 50 लाख से अधिक लोगों के पास आयुष्मान कार्ड हैं और लगभग 120 सरकारी एवं निजी अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं। योजना के तहत पात्र परिवारों को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक के निशुल्क उपचार की सुविधा मिलती है। ऐसे में सरकार चाहती है कि सभी अस्पताल एक समान डिजिटल प्रणाली अपनाएं, ताकि मरीजों को बेहतर और निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

इन डिजिटल सुविधाओं को करना होगा लागू

निर्देशों के अनुसार सभी अस्पतालों में हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम के साथ स्कैन एंड शेयर सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और फार्मासिस्टों की हेल्थ प्रोफेशनल आईडी तथा अस्पताल की हेल्थ फैसिलिटी आईडी अनिवार्य होगी। मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ना होगा।

इलाज की प्रक्रिया होगी अधिक आसान

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से मरीजों के इलाज में सुविधा बढ़ेगी। यदि किसी मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर किया जाता है, तो उसके उपचार का पूरा रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध रहेगा। इससे इलाज में तेजी आएगी और अनावश्यक जांच दोहराने की आवश्यकता भी कम होगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ेगी पारदर्शिता

मुख्य कार्यकारी अधिकारी रीना जोशी ने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था लागू होने से मरीजों के रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही अस्पतालों के बीच समन्वय बेहतर होगा और योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

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