Prohibition – पटना हाईकोर्ट के फैसले के बाद शराबबंदी मामलों में नई बहस
Prohibition – बिहार में शराबबंदी कानून से जुड़े मामलों पर पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि केवल ब्रेथ एनालाइजर की रिपोर्ट के आधार पर किसी व्यक्ति को शराब सेवन का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय के अनुसार, आरोप की पुष्टि के लिए रक्त जांच जैसी वैज्ञानिक जांच आवश्यक है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में मुजफ्फरपुर उत्पाद थाना में दर्ज एक प्राथमिकी और उससे जुड़े निचली अदालत के संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया।

2016 के मामले पर आया फैसला
यह मामला 24 नवंबर 2016 का है। आरोप था कि बीएमपी-6 के पास एक जवान कथित रूप से नशे की हालत में हंगामा करते हुए मिला था। उत्पाद विभाग ने मौके पर ब्रेथ एनालाइजर से जांच की और उसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में इस मामले में निचली अदालत ने संज्ञान भी ले लिया था। आरोपी ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
वैज्ञानिक जांच को बताया जरूरी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ब्रेथ एनालाइजर केवल प्रारंभिक जांच का माध्यम है। किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से दोषी ठहराने के लिए वैज्ञानिक और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं। अदालत की इस टिप्पणी को शराबबंदी कानून के तहत दर्ज मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर उन मामलों में जहां केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है।
शराब माफिया की संपत्तियों पर प्रशासन की नजर
दूसरी ओर, बिहार पुलिस ने शराब के अवैध कारोबार पर आर्थिक कार्रवाई तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। वर्ष 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद कथित रूप से अर्जित संपत्तियों की जांच की जाएगी। इसमें जमीन, मकान, फ्लैट, वाहन और बैंक निवेश जैसी परिसंपत्तियां शामिल होंगी। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति या अवैध कमाई के संकेत मिलते हैं, तो मामला आर्थिक अपराध इकाई और प्रवर्तन निदेशालय को भी भेजा जा सकता है।
तिरहुत रेंज में विशेष अभियान
तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को प्रत्येक थाना क्षेत्र के तीन प्रमुख शराब तस्करों की सूची तैयार करने और उनकी संपत्तियों का पूरा विवरण जुटाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को संबंधित विभागों और बैंकों के सहयोग से जानकारी एकत्र कर जब्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया है। प्रशासन का मानना है कि अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों पर कार्रवाई से इस नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।