Health – कान में कीड़ा घुसने पर घबराने के बजाय अपनाएं सुरक्षित प्राथमिक उपाय
Health – बरसात और गर्मी के मौसम में मच्छर, मक्खी, कॉकरोच के छोटे कीड़े और अन्य रेंगने वाले जीव घरों में अधिक दिखाई देते हैं। कई बार ये अनजाने में कान के भीतर चले जाते हैं, जिससे तेज असहजता, घबराहट और दर्द महसूस हो सकता है। ऐसी स्थिति में जल्दबाजी में कान के अंदर माचिस की तीली, चिमटी या किसी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कान के पर्दे को चोट पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में शांत रहकर सुरक्षित प्राथमिक उपाय अपनाना अधिक जरूरी है।

कपूर मिले पानी का किया जा सकता है इस्तेमाल
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. गौरव शर्मा के अनुसार, यदि कान में छोटा कीड़ा या मच्छर चला जाए तो कपूर मिले पानी का उपयोग प्राथमिक सहायता के तौर पर किया जा सकता है। इसके लिए थोड़े से पानी में एक या दो कपूर की गोलियां घोल लें। इसके बाद चम्मच या ड्रॉपर की मदद से इस घोल की कुछ बूंदें प्रभावित कान में सावधानीपूर्वक डालें। कपूर की तेज गंध कई छोटे कीड़ों के लिए असहज होती है, जिससे वे बाहर निकलने की कोशिश कर सकते हैं। बूंदें डालने के बाद सिर को उसी तरफ झुका लें, जिस कान में कीड़ा गया है, ताकि उसे बाहर आने में आसानी हो।
साफ पानी से भी मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों ने एक अन्य तरीका भी बताया है। यदि उपलब्ध हो तो बिना सुई वाली साफ सीरिंज में सामान्य पानी भरकर हल्के दबाव से कान में छोड़ा जा सकता है। इसके बाद सिर को प्रभावित कान की ओर झुका लें। कई मामलों में पानी के साथ कीड़ा भी बाहर निकल सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया बहुत सावधानी से करनी चाहिए और तेज दबाव से पानी नहीं डालना चाहिए।
कपूर न हो तो खारे पानी का विकल्प
अगर घर में कपूर उपलब्ध नहीं है, तो खारे पानी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके लिए पानी में पर्याप्त मात्रा में नमक मिलाकर घोल तैयार करें और उसकी कुछ बूंदें कान में डालें। इसके बाद सिर को प्रभावित कान की ओर झुकाएं। बताया जाता है कि कुछ छोटे कीड़े नमक वाले वातावरण में अधिक देर नहीं टिक पाते, जिससे उनके बाहर आने की संभावना बढ़ सकती है।
किन बातों का रखें विशेष ध्यान
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कान में कोई भी नुकीली या कठोर वस्तु डालने से हर हाल में बचें। इससे कीड़ा और भीतर जा सकता है या कान के अंदर गंभीर चोट लग सकती है। यदि घरेलू प्राथमिक उपायों के बाद भी कीड़ा बाहर न निकले, दर्द बढ़ जाए, सुनाई देने में दिक्कत हो, खून आए या लगातार बेचैनी बनी रहे, तो बिना देर किए ईएनटी विशेषज्ञ या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने से संभावित जटिलताओं से बचा जा सकता है।