ClimateChange – भीषण गर्मी के बीच फ्रांस और अमेरिका में जलवायु पर बढ़ी बहस
ClimateChange – यूरोप में रिकॉर्ड स्तर की गर्मी के बीच जलवायु परिवर्तन को लेकर फ्रांस और अमेरिका के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। फ्रांस इन दिनों गंभीर हीटवेव का सामना कर रहा है, जहां हाल के सप्ताहों में अत्यधिक तापमान का असर जनजीवन पर साफ दिखाई दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गर्मी से जुड़ी घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की मौत दर्ज की गई है। इसी बीच पेरिस की डिप्टी मेयर ऑड्रे पुलवर के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।

एसी के इस्तेमाल को लेकर दिया बयान
पेरिस की डिप्टी मेयर ऑड्रे पुलवर ने सोशल मीडिया पर कहा कि जलवायु संकट की जिम्मेदारी साझा रूप से समझी जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में प्रति व्यक्ति ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का स्तर काफी अधिक रहा है और दशकों से ऊर्जा की अधिक खपत ने वैश्विक तापमान बढ़ाने में भूमिका निभाई है। उनका यह बयान ऐसे समय आया जब सोशल मीडिया पर फ्रांस में सीमित एयर कंडीशनिंग व्यवस्था को लेकर कई टिप्पणियां की जा रही थीं।
सोशल मीडिया पर तेज हुई प्रतिक्रिया
ऑड्रे पुलवर ने अपने संदेश में उन टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें पेरिस में हर घर या इमारत में एयर कंडीशनिंग नहीं होने का मजाक बनाया गया था। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती पर व्यंग्य करने के बजाय सभी देशों को उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए। उनके बयान के बाद इस विषय पर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा देखने को मिली।
फ्रांस और अमेरिका में एसी उपयोग का अंतर
रिपोर्टों के अनुसार फ्रांस में लगभग एक चौथाई घरों में ही एयर कंडीशनिंग की सुविधा उपलब्ध है, जबकि अमेरिका में यह अनुपात लगभग 90 प्रतिशत बताया जाता है। इस अंतर को लेकर भी बहस तेज हुई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यूरोप में लंबे समय तक अपेक्षाकृत ठंडे मौसम के कारण एयर कंडीशनिंग का उपयोग सीमित रहा, लेकिन लगातार बढ़ते तापमान के बीच अब इस सोच में बदलाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिका भी झेल रहा है गर्मी का असर
जहां फ्रांस रिकॉर्ड तापमान से जूझ रहा है, वहीं अमेरिका के कई हिस्सों में भी भीषण गर्मी और ‘Heat Dome’ जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार कई क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है, जबकि आर्द्रता और अन्य मौसमीय परिस्थितियों के कारण इसका प्रभाव इससे भी अधिक महसूस हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक चुनौती बन चुकी है।
विशेषज्ञों ने टिकाऊ समाधान पर दिया जोर
जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी के बीच एयर कंडीशनिंग कई क्षेत्रों में जरूरत बनती जा रही है, लेकिन इसके साथ ऊर्जा दक्ष तकनीकों और स्वच्छ बिजली के उपयोग पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। पर्यावरणविदों के अनुसार हरित भवन, ऊर्जा दक्ष उपकरण, स्वच्छ ऊर्जा और शहरी हरित क्षेत्र जैसे उपाय भविष्य में तापमान के प्रभाव को कम करने में मददगार हो सकते हैं। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किसी एक देश के बजाय वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।