Congress – छात्र आंदोलन में सक्रिय हुई पार्टी, सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
Congress– प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मुद्दे पर जारी छात्र आंदोलन ने अब राजनीतिक स्वरूप भी लेना शुरू कर दिया है। हाल के घटनाक्रमों में कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए छात्रों के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के इस कदम से सरकार पर विपक्ष का दबाव पहले की तुलना में अधिक बढ़ा है।

शुरुआती दौर में अलग रही कांग्रेस
नीट परीक्षा विवाद के बाद कांग्रेस ने देशभर में छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों और विरोध अभियानों की रूपरेखा तैयार की थी, लेकिन जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन से उसने दूरी बनाए रखी। पार्टी के भीतर यह धारणा थी कि उस आंदोलन की प्रकृति और उसके राजनीतिक संदर्भों को लेकर स्पष्टता आवश्यक है। हालांकि, CJP की अपील के बाद कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे और वहां भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की, लेकिन पार्टी ने उस मंच पर औपचारिक रूप से अपनी भागीदारी दर्ज नहीं कराई।
संसद मार्च के बाद बदली रणनीति
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, संसद मार्च में बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं की भागीदारी ने पार्टी को अपने राजनीतिक रुख पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया। पार्टी का आकलन था कि परीक्षा प्रणाली को लेकर युवाओं के बीच व्यापक असंतोष मौजूद है। इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने इस मुद्दे को अधिक मजबूती से उठाने का निर्णय लिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के भीतर इस विषय पर चर्चा की मांग को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात कर सदन में चर्चा कराने का आग्रह किया।
कानूनी सहायता का भी किया ऐलान
पार्टी ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए या कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों और युवाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की भी घोषणा की है। कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों को आवश्यक कानूनी सहयोग दिया जाएगा। इस कदम को आंदोलन के प्रति पार्टी के बढ़ते समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
धरने के दौरान हिरासत में लिए गए नेता
मंगलवार को राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के निकट धरना दिया। पुलिस ने निषेधाज्ञा के उल्लंघन का हवाला देते हुए उन्हें हिरासत में लिया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने परीक्षा संबंधी मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग और तेज कर दी है।
राजनीतिक बहस के केंद्र में परीक्षा का मुद्दा
परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के हितों को लेकर चल रही बहस अब संसद से लेकर सड़कों तक पहुंच चुकी है। विपक्षी दल इस विषय पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सरकार अपनी ओर से संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई और जांच की बात कह रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।