SaudiArabia – आठ साल से सऊदी में फंसे पिता की वापसी के लिए बेटी ने शुरू की मुहिम
SaudiArabia– उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के गोरसाड़ा गांव का एक परिवार पिछले आठ वर्षों से अपने मुखिया की घर वापसी का इंतजार कर रहा है। परिवार के सदस्य इंद्रमणि नौटियाल सऊदी अरब में कानूनी प्रक्रिया के कारण फंसे हुए हैं। अब उनकी बेटी दीपिका नौटियाल ने पिता को भारत वापस लाने के लिए आर्थिक सहयोग जुटाने का अभियान शुरू किया है। परिवार को उम्मीद है कि लोगों की मदद से लंबे समय से चला आ रहा यह इंतजार जल्द खत्म हो सकेगा।

सड़क हादसे के बाद बदल गई जिंदगी
जानकारी के अनुसार, इंद्रमणि नौटियाल सऊदी अरब में ट्रक चालक के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 2018 में उनके वाहन से जुड़े एक सड़क हादसे में चार लोगों की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में उन्हें एक वर्ष की सजा सुनाई गई, जिसे उन्होंने पूरी कर ली। हालांकि, वाहन का बीमा नहीं होने के कारण स्थानीय अदालत ने उन पर करीब नौ लाख रियाल यानी लगभग दो करोड़ रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया। निर्धारित राशि जमा नहीं होने की वजह से उनकी स्वदेश वापसी अब तक संभव नहीं हो सकी है।
वीडियो संदेश में जताया आभार
सऊदी अरब से जारी एक वीडियो संदेश में इंद्रमणि नौटियाल ने उनकी मदद के लिए आगे आ रहे लोगों और विशेष रूप से अपनी बेटी का धन्यवाद किया। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि लोगों का सहयोग और शुभकामनाएं ही उनके भारत लौटने की उम्मीद को जिंदा रखे हुए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयास से एक दिन वह अपने परिवार के बीच जरूर लौटेंगे।
सहयोग अभियान में आ रहीं तकनीकी चुनौतियां
दीपिका की ओर से शुरू किए गए आर्थिक सहयोग अभियान को समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन मिल रहा है। हालांकि, डिजिटल भुगतान के दौरान यूपीआई लेनदेन में तकनीकी दिक्कतें भी सामने आ रही हैं, जिसके कारण कई बार राशि समय पर खाते तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके बावजूद कुछ लोग सीधे नकद सहयोग भी उपलब्ध करा रहे हैं। इस पहल में समाजसेवी रोशन रतूड़ी, पूर्व विधायक विजय पाल सजवाण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण और लंबगांव व्यापार मंडल के अध्यक्ष उदय रावत सहित कई स्थानीय लोग सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।
कानूनी सहायता की भी उठी मांग
देहरादून के वरिष्ठ अधिवक्ता शिवा वर्मा ने इस मामले को मानवीय और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों को समन्वय बनाकर पीड़ित परिवारों को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। उनका मानना है कि विदेशों में कानूनी कारणों से फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के लिए संस्थागत सहयोग जरूरी है।
बेटी को लोगों की मदद पर भरोसा
दीपिका नौटियाल ने बताया कि परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पहले पूरी तरह उनके पिता पर थी। उनकी मां गृहिणी हैं, जबकि छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुकी दीपिका ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से सहायता की अपील शुरू की है। उनका कहना है कि आठ वर्षों से परिवार पिता से नहीं मिल सका है। राशि भले ही बहुत बड़ी हो, लेकिन उन्हें विश्वास है कि यदि अधिक से अधिक लोग अपनी क्षमता के अनुसार छोटा-सा सहयोग भी करें, तो उनके पिता की घर वापसी का रास्ता खुल सकता है। परिवार आज भी उसी उम्मीद के साथ हर दिन का इंतजार कर रहा है।